चंडीगढ़। ऊर्जा प्रबंधन प्रकोष्ठ (EMC) / राज्य नामित एजेंसी (SDA), इंजीनियरिंग विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के सहयोग से डिकार्बोनाइजेशन और ईंधन दक्षता विषय पर कार्यशाला का आयोजन होटल शिवालिकव्यू, सेक्टर 17, चंडीगढ़ में किया गया।
सतत परिवहन एवं ऊर्जा संरक्षण पर कार्यशाला का आयोजन
कार्यशाला का शुभारंभ इंजि. सी.बी. ओझा, मुख्य अभियंता, यू.टी. चंडीगढ़ ने किया। उन्होंने जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए, नवोन्मेषी समाधानों और सामूहिक प्रयासों की अहमियत को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने चंडीगढ़ को सन् 2047 तक कार्बन-न्यूट्रल, नेट-जीरो शहर बनाने की दृष्टि साझा की और ऊर्जा प्रबंधन प्रकोष्ठ की ऊर्जा संरक्षण एवं सतत विकास पहलों में सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला।
एम.के. सिन्हा, IOCL ने ईंधन दक्षता, मिश्रण और स्वच्छ ऊर्जा प्रथाओं से जुड़े विचार साझा किए और डिकार्बोनाइजेशन के व्यापक लक्ष्यों को समर्थन दिया। तकनीकी सत्रों में पर्यावरण हितैषी ड्राइविंग, विद्युत गतिशीलता, ईंधन दक्ष टायर, स्मार्ट वाहन रखरखाव, एलपीजी संरक्षण और घरेलू सुरक्षा पर चर्चा की गई। यशजीत गुप्ता, महाप्रबंधक (परिवहन), चंडीगढ़ प्रशासन ने चंडीगढ़ परिवहन उपक्रम द्वारा क्षेत्र में ईंधन दक्षता और सतत गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए लागू की जा रही विभिन्न पहलों के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला में लगभग 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें चंडीगढ़ एवं हरियाणा परिवहन विभागों के अधिकारी, अभियंता, शिक्षाविद तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे। कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक आह्वान के साथ हुआ, जिसमें सतत परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और ऊर्जा दक्षता को डिकार्बोनाइजेशन की दिशा में प्रमुख मार्ग बताया गया तथा इस परिवर्तन में चंडीगढ़ प्रशासन की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया गया।