चंडीगढ़। फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के डिपार्टमेंट ऑफ जनरल, एंड मिनिमल इनवेसिव सर्जरी ने दुनिया के सबसे एडवांस्ड फोर्थ जेनरेशन रोबोट - दा विंची इलेवन के माध्यम से जटिल हर्निया से पीड़ित कई बुजुर्ग मरीजों को नई जिंदगी प्रदान की है। इन सभी मामलों में, समय पर इंटरवेंशन महत्वपूर्ण था, क्योंकि देरी से बुजुर्ग मरीजों को गंभीर समस्याएं हो सकती थीं। कई मामलों में तो उनकी जान तक को भी जोखिम हो सकता था। पहले मामले में एक 80 वर्षीय व्यक्ति को पेट में तेज दर्द, सूजन और तेज़ दिल की धड़कन की समस्या हो रही थी। उनकी पहले हर्निया की सर्जरी हो चुकी थी, लेकिन वे बार-बार संक्रमण और लगातार बिगड़ते लक्षणों से पीड़ित रहे। कई अस्पतालों से कंसल्टेंशन और इलाज करवाने के बावजूद, उनकी बढ़ती उम्र के कारण उन्हें बार-बार सर्जरी न करने की सलाह दी गई।
फोर्टिस में रोबोट-असिस्टड सर्जरी से जटिल हर्निया से पीड़ित बुजुर्ग मरीजों का सफल इलाज
इस तकलीफ को सहन न कर पाने के कारण, मरीज़ ने फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली के डॉ.इकबाल सिंह, सीनियर कंसल्टेंट और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से मुलाकात की। डॉ. सिंह ने उनकी स्थिति को रेकरेंट इनगुनियल हर्निया की समस्या के बारे में बताया। इस तरह के मामले में जब टिश्यूज पेट की दीवार, विशेष रूप से कमर के क्षेत्र में, या पहले की गई सर्जरी की जगह पर किसी छिद्र से बाहर निकल आते हैं, तो इस प्रकार की समस्या हो जाती है। इलाज में देरी से आंतों में रुकावट हो सकती थी, जो एक संभावित घातक जटिलता थी। इसका तुरंत इलाज करने की जरूरत थी।
इस मामले की जटिलता के बावजूद, डॉ. सिंह ने रोबोट की सहायता से हर्निया रिपेयर सर्जरी करने का फैसला किया। मरीज़ की सर्जरी के बाद आसानी से रिकवरी हुई और प्रोसीजर के अगले ही दिन उसे छुट्टी दे दी गई। मरीज अब पूरी तरह से ठीक हो गया है और अपनी सामान्य जिंदगी जी रहा है। एक अन्य मामले में, एक 88 वर्षीय महिला को जटिल पित्ताशय (गाल स्टोन) की पथरी के साथ एक लार्ज इनसिजीनल हर्निया भी था। डॉ. सिंह ने रोबोट की सहायता से इनसिजीनल हर्निया रिपेयर और रोबोट की सहायता से कोलेसिस्टेक्टोमी (गाल ब्लेडर को हटाना) की सर्जरी की। मरीज़ की हालत में सुधार हुआ और प्रोसीजर के तीन दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस नई शुरुआत के बारे में बात करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि हमने इनगुनियल हर्निया के लिए रोबोट-असिस्टड टीईपी रिपेयर भी की है। यह एडवांस् टेक्नोलॉजी एबीडोमिनल कैविटी में प्रवेश किए बिना की जाती है, जिससे पेट के अंदर की जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है।