भिवानी। भिवानी के गांव ढाणी लक्ष्मण की 19 वर्षीय टीचर मनीषा की हत्या मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। यह हत्याकांड अब जन आंदोलन बन गया है। मनीषा को न्याय दिलाने के लिए लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर अनेक जगहों पर लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। वहीं सिंघानी गांव के लोग शनिवार सुबह से ही बाजार बंद करके पद यात्रा में निकलते हुए ढिगावा में चल रहे धरने में पहुंचे। लोहारू, ढिगावा, बहल, ईश्वरवाल आदि कस्बों में शनिवार बाजार पूरी तरह बंद रखकर दुकानदार भी मनीषा को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन में कूद गए।
टीचर मनीषा की हत्या मामले ने तूल पकड़ा
-सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन, बाजार बंद करवाए
-ग्रामीणों के धरने पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं का जुटना हुआ शुरू
मामले में सीएम सैनी का बड़ा एक्शन, एसपी समेत कई पुलिसकर्मी हटाए
वहीं सिंघानी में चल रहे परिजनों व ग्रामीणों के धरने पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं का जुटना भी शुरू हो गया है। शनिवार को पूर्व कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल, पूर्व विधायक सुखबीर मांढी पहुंचे। जबकि लोहारू से कांग्रेस विधायक राजबीर फरटिया, पूर्व विधायक सोमबीर सिंह, कांग्रेस जिला ग्रामीण अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी सहित कई नेता पहुंचे। वहीं जनसंगठनों से कामरेड ओमप्रकाश, कमल प्रधान, जनवादी महिला समिति की टीम भी पहुंची। हांसी की नशा मुक्ति अभियान की ब्रांड अंबेसडर सियाज पूनिया धरने के बीच पहुंची। किसान नेता रवि आजाद ने भी धरना पर पहुंच कर समर्थन दिया। नेताओं ने प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था और बेटी की निर्मम हत्या करने वाले हत्यारों की तीन दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने पर रोष जताया। इस दौरान वक्ताओं ने पुलिस प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया।
मामले में सीएम सैनी का बड़ा एक्शन, एसपी समेत कई पुलिसकर्मी हटाए
इधर, टीचर मनीषा की मां का रो रोकर बुरा हाल बना हुआ है। उसने 13 अगस्त को अपनी बेटी की सिर कटी लाश मिलने के बाद से ही अन्न का एक दाना नहीं खाया। पिता सहित सभी परिवारजनों का कहना है कि हत्यारे रूपी जल्लादों को देखने के बाद ही वे खाना खाएंगे। पुलिस की ढीली कार्रवाई और लापरवाही पर सीएम नायब सिंह सैनी ने 15 अगस्त वाले दी ही एसपी मनबीर सिंह का तबादला करके सुमित कुमार को नया एसपी लगाया है। वहीं लोहारू थाने के एसएचओ अशोक, लेडी एएसआई शकुंतला, इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल के ईएसआई अनूप, कांस्टेबल पवन और एसपीओ धर्मेंद्र को सस्पेंड कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि 11 अगस्त को मनीषा अपने प्ले स्कूल में पढ़ाने के बाद सिंघानी गांव के एक नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन के लिए गई थी। सीसीटीवी फुटेज में भी दोपहर दो बजे के आसपास मनीषा वहां जाते हुए दिखाई दी, लेकिन नर्सिंग कॉलेज में जाने के बाद से उसका कोई अता पता नहीं चला। शाम छह बजे उसने अपने भाई को फोन करके बातें करने की कोशिश की थी लेकिन तुरंत फोन कट गया था। उसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। इसके दो दिन बाद उसकी गर्दन कटी हुई लाश इस नर्सिंग कॉलेज से कुछ ही दूर एक नहर के पास खेत में पड़ी हुई मिली थी। लाश को देखकर लोगों की रूह कांप गई थी। अंदेशा जताया जा रहा है कि दरिंदों ने उसके साथ गैंगरेप करने के बाद तेज धार हथियार से बहुत बेरहमी से उसकी गर्दन काट दी। चेहरे को बुरी तरह कुचल दिया गया ताकि पहचान न हो सके।
इस पूरे मामले में जैसा अक्सर पुलिस का रवैया होता है, पुलिस ने गुमशुदगी के पहले दिन 11 अगस्त को परिजनों की मदद करने के बजाय बेटी के चरित्र पर छींटाकशी करके परिजनों को तोड़ने का काम किया। लोगों का कहना है कि यदि वारदात वाले दिन 11 अगस्त को ही पुलिस मामले को गंभीरता से ले लेती तो मनीषा के साथ ये वारदात नहीं होती। लोगों में पुलिस के प्रति काफी रोष पनपा हुआ है। दोषियों को पकडक़र बेनकाब किए जाने तक मनीषा के शव का अंतिम संस्कार नहीं किए जाने के निर्णय लिया हुआ है। सरकार और पुलिस प्रशासन लोगों के बीच पूरी तरह कठघरे में खड़े हैं।