बरनाला , 4 मई । वैश्विक महामारी से देश संकट में है, सरकारें वोट बैंक की खातिर खुद समझ नहीं पा रही हैं की वे आखिर क्या करें, जो मन में आया वही किया जा रहा है। बता दें कि पंजाब सरकार दूसरे प्रांतों में नौकरी कर रहे पंजाब के मूल निवासी बच्चों को अपने घर लाने की इजाजत नहीं दी जा रही, जबकि बरनाला से 59 काश्मीरियों को यह कह कर रवाना कर दिया गया कि वे यहां खुद को फंसे महसूस कर रहे थे और उन्हें अपने परिवारों के साथ रमजान का महीना मनाना है। यही ही बस नहीं पंजाब सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा काश्मीरियों को जम्मू-काश्मीर रवाना करने के लिए दो बसों का प्रबंध भी किया गया। उल्लेखनीय है कि देश में कुछ ही ऐसे जिले हैं जो कोरोना वायरस से मुक्त हैं। उनमें पंजाब का जिला बरनाला भी शामिल है। गौरतलब है कि एक तरफ तो सरकार ने नियम बना दिया है कि किसी जरूरी काम के अलावा कोई भी व्यक्ति दूसरे राज्य में आ-जा नहीं सकता। लेकिन अब बरनाला में अपने रिश्तेदारों के पास रह रहे 59 काश्मीरी लोगों को वहां जाने की आजादी देने के साथ ही उन्हें रवाना भी कर दिया गया है। ताकि वह सभी अपने परिवार के संग रमजान का महीना मनाने उनके पास पहुंच सकें। जबकि बरनाला के कई परिवार ऐसे हैं, जिनके बच्चे दूसरे प्रांतों में जॉब कर रहे हैं, जिनकी कंपनियों के गेट पर लॉकडाउन होते ही ताला लग चुका है और पेईंग गैस्ट (पीजी) के मालिकों ने भी उनके लिए भोजन प्रबंध करने से मनाह कर दिया है। इन बातों को ध्यान में रखने के बावजूद जरूरतमंद परिवारों को दूसरे प्रांत की सीमा पार करने और उसी दिन वापिस लौटने से मनाह कर दिया गया है। जबकि अपने बच्चों को घर लाने के लिए परिजन अपनी खुद की जेब से खर्च करने और अपने वाहन में सेनीटाईजेशन से लेकर हर तरह का प्रबंध करने का वास्ता भी दे चुके हैं। उन्हें यह कह कि यदि बच्चों को लाना है तो सभी को 21 दिन एकांतवास में रहना होगा। कुछ पेश नहीं चलती देख पीडि़त परिजन बच्चों को स्थिती का मुकाबला करने को कह शांत हो गए।