चंडीगढ़, 16 अक्टूबर : वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा फिल्लौर में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक को मुख्यमंत्री का एकतरफा प्रवचन करार दिया है। चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, सांपला ने बैठक पर सवाल उठाते हुए कहा कि नशे के मुद्दे पर कोई ठोस चर्चा करने के बजाय चुटकुलों और शेरो-शायरी के जरिए बात खत्म करने की कोशिश की गई।
सांपला ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या उतनी गंभीर नहीं है, जितनी बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि राज्य में नशे की कोई बड़ी समस्या नहीं है, तो फिर ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान किसके खिलाफ चलाया जा रहा है? सरकार को इन सवालों के जवाब देने चाहिए।
मुख्यमंत्री जी, यदि पंजाब में नशा नहीं है तो ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ किसके खिलाफ लड़ रहे हैं: विजय सांपला
उन्होंने कहा कि इस बैठक में आईएएस, आईपीएस, पीपीएस और पीसीएस अधिकारी भी शामिल थे। ऐसे में नशे की समस्या पर गंभीर विचार-विमर्श होना चाहिए था। लेकिन मुख्यमंत्री ने सभी को बड़े हॉल में बैठाकर अपना रटा-रटाया भाषण दिया और वहां से चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने न तो नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की हत्याओं के बारे में कोई ठोस बात की और न ही नशे के खिलाफ लड़ाई को लेकर कोई बड़ी घोषणा की, जबकि मौजूदा हालात में ऐसा किया जाना जरूरी था।
मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए सांपला ने कहा कि मुख्यमंत्री की रसोई में फुल्के को ज्यादा सेंक लगने पर भी वे नरेंद्र मोदी सरकार की ओर उंगली उठाते हैं और उन्हें सपनों में भी अमित शाह ही नजर आते हैं। सांपला ने कहा कि परविंदर झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए गठित साझा इंसाफ कमेटी भी मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे की मांग कर रही है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री भगवंत मान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दें, अन्यथा पंजाब की जनता उन्हें सत्ता से बाहर कर देगी।