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पंजाब

किशोरों में नशे के शुरुआती संकेत पहचानें, समय पर करें हस्तक्षेप: डॉ. बलबीर सिंह

Updated on Monday, August 31, 2026 18:00 PM IST

चंडीगढ़, 31 अगस्त 2026: भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत अब नशे की आपूर्ति पर रोक लगाने के साथ-साथ युवाओं के नशे की चपेट में आने की संभावना को शुरुआती चरण में पहचानने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उसी समय मदद मिल सके, जब कभी-कभार या प्रयोग के तौर पर किया जाने वाला नशीले पदार्थों का सेवन आगे चलकर नशे पर निर्भरता या लत में न बदल जाए। ऐसे में अभिभावकों के सामने एक सीधा सवाल है: क्या परिवार के सदस्य ऐसे संकेत पहचान सकते हैं, जिनके आधार पर समय रहते हस्तक्षेप करके बच्चे को नशे की लत में पड़ने से रोका जा सके? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संकेत मौजूद होते हैं।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “देखभाल, संवेदनशीलता और बातचीत के माध्यम से हर बच्चे को नशे की लत से बचाया जा सकता है। परिवार, देखभाल करने वालों और पूरे समाज के रूप में हमें अपनी आंखें, कान और दिल खुले रखने होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “यदि आपको अपने किसी करीबी व्यक्ति के व्यवहार में कुछ चिंताजनक बदलाव दिखाई देते हैं, तो उन पर ध्यान दें और संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया दें।”

समय रहते पहचानें: नशीले पदार्थों के सेवन के वे संकेत, जिनके बारे में अभिभावकों को पता होना चाहिए

देखभाल, संवेदनशीलता और बातचीत के माध्यम से हर बच्चे को नशे की लत से बचाया जा सकता है: डॉ. बलबीर सिंह

बच्चों के लिए ऐसा सुरक्षित सहारा बनें कि नशा उनके लिए कभी भी बचने का रास्ता न बने: डॉ. ईशान प्रकाश (नोडल मनोचिकित्सक, संगरूर)

 
शुरुआती संकेतों की पहचान

नशे की लत हमेशा किसी बड़े या स्पष्ट चेतावनी संकेत के साथ सामने नहीं आती। अक्सर इसकी शुरुआत बहुत चुपचाप होती है—जैसे व्यवहार में बदलाव, पुराने दोस्तों की जगह नए दोस्त, किसी गुप्त या छिपे हुए समूह का हिस्सा बन जाना, घंटों तक बाथरूम या अंदर से बंद कमरे में रहना, या उन गतिविधियों और शौकों में अचानक रुचि खत्म हो जाना, जो पहले बच्चे के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते थे।

अभिभावकों के साथ बातचीत के दौरान बच्चे के व्यवहार में गुस्सा, भावनात्मक उत्तेजना आदि जैसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं। स्कूल या शिक्षकों की ओर से बार-बार शिकायतें मिलना भी एक संकेत हो सकता है। नींद में बदलाव भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। पूरी रात जागते रहना, असामान्य समय पर सोना या दैनिक दिनचर्या में अचानक बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि कुछ गलत है। इसी तरह, बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार पैसे मांगना और यह न बता पाना कि पैसा कहां खर्च हुआ, या घर में से पैसे गायब होना भी चिंता का कारण हो सकता है।

दिखावट और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति लापरवाही, भूख कम होना या वजन घटना और खान-पान की आदतों में बदलाव भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ शारीरिक संकेत भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे आंखों का लाल या धुंधला/बेजान दिखाई देना, पुतलियों के आकार में असामान्य बदलाव, अत्यधिक सुस्ती या बार-बार थकान महसूस होना, बेचैनी, हाथ-पैर कांपना, बोलने में अस्पष्टता, शारीरिक तालमेल में कमी, बार-बार चोट के निशान या गंभीर मामलों में इंजेक्शन लगाने के निशान।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक संकेत के आधार पर नशीले पदार्थों के सेवन की पुष्टि नहीं की जा सकती। किशोर का कभी-कभार देर रात तक जागना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन यदि कोई बच्चा लगातार खुद को अलग-थलग रखने लगे, बहुत अधिक गुप्त व्यवहार करे, अपने आसपास की चीजों के प्रति उदासीन नजर आए और मामूली सवाल पूछने पर भी रक्षात्मक हो जाए, तो इन संकेतों के एक साथ दिखाई देने को व्यवहार में बन रहे एक पैटर्न के रूप में देखना चाहिए। ऐसे समय अभिभावकों को विशेषज्ञ की मदद लेने पर विचार करना चाहिए।

जिला नोडल मनोचिकित्सक, संगरूर, डॉ. ईशान प्रकाश ने कहा, “परिवारों द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलतियों में से एक है मदद लेने में देरी करते रहना। बच्चा नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा है, यह साबित करने के लिए बातचीत शुरू करने या किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने से पहले पक्के सबूत की प्रतीक्षा करना जरूरी नहीं है। हमारे समाज में कई अभिभावकों की सामाजिक बदनामी या ‘लोग क्या कहेंगे’ जैसी चिंता युवा को समय पर सहायता मिलने में बाधा बन सकती है। किसी युवा के गंभीर मुश्किल में फंसने की प्रतीक्षा करने के बजाय समय रहते मार्गदर्शन लेना हमेशा बेहतर होता है।” उन्होंने कहा, “देखभाल करने वाले अभिभावक नशे की लत के खिलाफ पहली सुरक्षा पंक्ति हैं। बच्चों के लिए ऐसा सुरक्षित सहारा बनें कि नशा उनके लिए कभी भी बचने का रास्ता न बने।”

समय पर हस्तक्षेप

एक बार व्यवहार में किसी तरह का पैटर्न दिखाई देने लगे, तो उसकी पहचान करने के साथ-साथ अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। बच्चे को भाषण देने या डांटने के बजाय खुले सवाल पूछना, शांत और निष्पक्ष रवैया अपनाना तथा बच्चे की बात को वास्तव में ध्यान से सुनना अधिक प्रभावी होता है। उदाहरण के लिए, “हमें लगता है कि कोई बात तुम्हें परेशान कर रही है। क्या तुम बताना चाहोगे कि इन दिनों स्कूल में क्या चल रहा है?” जैसे सरल सवाल सीधे आरोप लगाने के बजाय बातचीत के लिए कहीं बेहतर माहौल पैदा कर सकते हैं।

यदि अभिभावकों को पता चलता है कि बच्चा नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा है, तो स्वाभाविक रूप से सख्त प्रतिक्रिया देने का मन हो सकता है, लेकिन ऐसा करना अक्सर स्थिति को और बिगाड़ सकता है। भावनात्मक रूप से तनावपूर्ण टकराव बच्चे को और अधिक गुप्त व्यवहार की ओर धकेल सकता है। ऐसे में बेहतर तरीका यह है कि अभिभावक पहले खुद को शांत करें और फिर बच्चे के साथ निजी तथा शांतिपूर्ण बातचीत करें, जिसका उद्देश्य उसके व्यवहार के पीछे के कारणों को समझना हो। यदि नशीले पदार्थों के सेवन का संदेह हो या बच्चा खुद इसके बारे में बताए, तो अभिभावकों को उसे शर्मिंदा करने, धमकाने, किसी नकारात्मक नाम या लेबल से संबोधित करने या केवल सजा पर निर्भर रहने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे तरीके बच्चे को मदद मांगने से हतोत्साहित कर सकते हैं। इसके बजाय, अभिभावकों को उसकी बात ध्यान से सुननी चाहिए, अपनी चिंता और परवाह व्यक्त करनी चाहिए तथा बच्चे के साथ मिलकर उसके लिए उचित सहायता और उपचार का रास्ता तलाशना चाहिए।

यदि आप अपने बच्चे को लेकर चिंतित हैं या यह समझ नहीं पा रहे हैं कि शुरुआत कहां से करनी है, तो आपको यह सब कुछ अकेले करने की आवश्यकता नहीं है। परिवार टेली-मानस हेल्पलाइन 1800-89-14416 पर संपर्क करके गोपनीय और विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

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