धूरी:- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 17 मार्च को धूरी में 21.65 करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक सब-डिविजनल अस्पताल और माता-शिशु स्वास्थ्य केंद्र को जनता को समर्पित किया। यह स्वास्थ्य परियोजना संगरूर जिले के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस नए कॉम्प्लेक्स में 50 बिस्तरों वाला सब-डिविजनल अस्पताल और 30 बिस्तरों का विशेष माता-शिशु स्वास्थ्य ब्लॉक शामिल है, जिससे कुल क्षमता 80 बिस्तरों तक पहुंच गई है। लगभग 73,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला यह अत्याधुनिक भवन धूरी शहर सहित आसपास के करीब 70 गांवों के हजारों लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
माता-शिशु स्वास्थ्य देखभाल केंद्र से संगरूर का स्वास्थ्य ढांचा और मजबूत हुआ – मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान नए अस्पताल से धूरी शहर और 70 गांवों के हजारों लोगों को मिलेंगी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं – भगवंत सिंह मान मुफ्त इलाज और 10 लाख की स्वास्थ्य योजना के साथ ‘आप’ सरकार किसी भी परिवार को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नहीं रहने देगी – मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
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मुख्यमंत्री ने बताया कि अस्पताल में ओपीडी, इमरजेंसी सेवाएं, इनडोर इलाज, जांच सुविधाएं और विशेष चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। यहां 13 ओपीडी कमरे, इमरजेंसी ब्लॉक, 7 ऑपरेशन थिएटर, 3 लैब, ईसीजी, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इसके अलावा 12 निजी कमरे, 6 जनरल वार्ड, 11 नर्स स्टेशन, दवा भंडार और लिफ्ट जैसी सुविधाएं भी मरीजों की सुविधा के लिए मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल न केवल सामान्य चिकित्सा सेवाएं देगा, बल्कि घुटना प्रत्यारोपण और ईएनटी जैसी विशेषज्ञ सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा। माता-शिशु केंद्र में गर्भवती महिलाओं के लिए सामान्य और सिजेरियन डिलीवरी की सुविधाएं विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में दी जाएंगी, जिससे माताओं और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यहां माताओं और बच्चों के लिए आवश्यक इलाज और जांच मुफ्त उपलब्ध होंगी। साथ ही, श्रमिकों के लिए ईएसआई डिस्पेंसरी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी। राज्य में स्वास्थ्य सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने 1500 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की है और आम आदमी क्लीनिकों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया गया है। इसके अलावा, 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मुफ्त दवाइयों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।