चंडीगढ़ | भवानीगढ़ ट्रक यूनियन के प्रधान पद को लेकर पैसे के लेन-देन के आरोपों और एक ट्रक ऑपरेटर द्वारा आत्महत्या के प्रयास ने पंजाब सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी "जीरो टॉलरेंस" नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अरविन्द खन्ना ने कहा कि यह नीति केवल छोटे कर्मचारियों पर लागू होती है, जबकि 'आप' विधायकों को इससे छूट मिली हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक नरिंदर कौर भारज और उनके पति पर ट्रक यूनियन के प्रधान पद के लिए 30 लाख रुपये की सौदेबाजी का आरोप लगा है, जिसका एक वीडियो भी सामने आया है। खन्ना ने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच सिटिंग जज से कराई जाए क्योंकि राज्य सरकार की एजेंसियों पर जनता का विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह, जो विधायक भारज के करीबी माने जाते हैं, इस मामले में संलिप्त हैं, लेकिन अब उनसे दूरी बनाने की कोशिश की जा रही है।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सिटिंग जज और ईडी से हस्तक्षेप की मांग
खन्ना ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री भगवंत मान वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं, तो उन्हें इस मामले की जांच ईडी से भी करानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विधायक भारज भाजपा नेताओं गुरतेज झनेड़ी और विपन शर्मा को गलत तरीके से इस मामले में घसीट रही हैं, जबकि वे ट्रक यूनियन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और यूनियन से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे।