चंडीगढ़ | शिरोमणी अकाली दल के वरिष्ठ अकाली नेता सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज पंजाब पुलिस के सहायक सब इंस्पेक्टर जसबीर सिंह एवं ए.एस.आई हीरा सिंह को राष्ट्रपति पुलिस पदक देने की सिफारिश की है। उन्होने कहा कि उनपर जब हमले का प्रयास किया गया तो अधिकारी द्वारा 4 दिसंबर को हरिमंदिर साहिब, अमृतसर परिसर में दिखाए गए ‘असाधारण और अनुकरणीय साहस और निस्वार्थ समर्पण के लिए यह पदक दिया जाना चाहिए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में जिसकी प्रतियां डीजीपी पंजाब सहित संबंधित सरकारी अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होने कहा, यह केवल महान गुरु साहिबान के आर्शीवाद और सर्वशक्तिमान की दया के कारण ही संभव हुआ कि उस दिन ए.एस.आई जसबीर सिंह एवं ए.एस.आई हीरा सिंह वहां मौजूद थे।
सरदार बादल ने कहा , यह उल्लेखनीय है कि जसबीर सिंह ने अपने कर्तव्य के प्रति दुर्लभ और महान साहस और प्रतिबद्धता का परिचय दिया और सिख धर्म के सबसे पवित्र गुरुद्वारा, हरिमंदिर साहिब की पवित्रता की रक्षा करने और मेरी जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।
सरदार सुखबीर सिंह बादल ने ए.एस.आई जसबीर सिंह एवं ए.एस.आई हीरा सिंह को राष्ट्रपति अवाॅर्ड देने की सिफारिश की
वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा, दुखद घटनाओं के क्रम को रोकना किसी ईश्वरीय कृपा से कम नही है, खासकर तब जब इस स्थान की पवित्रता और पंजाब में शांत और साम्प्रदायिक सदभाव के माहौल को बिगाड़ने पर तुले लोगों को राज्य के उच्च और शक्तिशाली लोगों को खुल्लम-खुल्ला संरक्षण प्राप्त है।
इस बीच अकाली दल सांसद बीबा हरसिमरत कौर बादल ने भी अमित शाह को पत्र लिखकर इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होने ए.एस.आई जसबीर सिंह एवं ए.एस.आई हीरा सिंह की डयूटी पर बहादुरी के असाधारण कार्य को राष्ट्रपति पदक के पुरस्कार की सिफारिश की। उन्होने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार पर ‘ राजनीतिक प्रतिद्धंद्धियों की हत्याओं जैसे कृत्यों के लिए भड़काउ बयान जारी करने की कड़ी निंदा की है।
बीबा हरसिमरत कौर बादल ने अमित शाह को पत्र लिखकर ‘प्रायोजित हमले’ की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की
बीबा बादल ने बताया कि सरदार बादल की हत्या के प्रयास से कुछ मिन्ट पहले, विवादास्पद व्यक्ति, जिनका आपराधिक रिकाॅर्ड इतना उंचा है कि राज्य का हर थाना इंचार्ज इन अपराधियों की पहचान जानता है उसके साथ पंजाब पुलिस के वरिष्ट अधिकारी, जिनमें एस.पी भी शामिल है, वह उससे बातचीत करने में व्यस्त थे। इन विवादास्पद हस्तियों में नारायण सिंह चैड़ा प्रमुख थे।
उन्होने कहा, इन विवादास्पद व्यक्तियों को न सिर्फ आजाद घूमने की अनुमति दी गई बल्कि उनके इच्छित शिकार तक निर्देशित किया गया। उन्होने कहा कि अविश्वसनीय रूप से सरदार बादल की हत्या के लिए पूर्व निर्धारित समय पर उनके आसपास सादे कपड़ों में कोई सुरक्षा अधिकारी नही था, जिसके कारण हत्यारे को अपने लक्ष्य तक बिना किसी बाधा के पहुंचने की अनुमति मिली।
बीबा बादल ने यह स्पष्ट किया कि हत्या का प्रयास कोई छिटपुट घटना नही थी और न ही यह अकेले व्यक्ति द्वारा किया गया कोई व्यक्तिगत हमला था। यह साफ तौर पर पूर्व प्रायोजित कृत्य और सिख लीडरशीप को खत्म और कमजोर करने की गहरी साजिश का हिस्सा था। इसका मकसद बहादुर और देशभक्त सिख समुदाय को पूरी तरह से नेतृत्वविहीन करना और भ्रम पैदा करके साम्प्रदायिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचाना था।