चंडीगढ़,7 नवंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) । पंजाब में हत्याओं के सात बड़े मामले सुलझाने के दौरान गर्मख्यालियों व गैंगस्टरों का गठजोड़ सामने आया है। राज्य के डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने बताया कि पुलिस की जांच से यह शक सही साबित होता है। यह सभी मामले टारगेट किलिंग के हैं।
नाभा जेल में बंद धर्मेंद्र उर्फ गुगनी का संबंध भी गर्मख्यालियों से हैं। जांच में खुफिया और काउंटर-इंटेलीजेंस विंग के साथ-साथ बटाला व मोगा की जिला पुलिस ने साझे तौर पर काम किया। यहां मीडिया से बातचीत में डीजीपी ने भरोसा दिलाया कि पंजाब के लो गपुलिस की कोशिशों से सुरक्षित हाथों में हैं।
डीजीपी ने कहा कि हत्यारों ने हर केस में कुछ न कुछ सुराग छोड़े थे। जैसे दुर्गा प्रसाद और ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा केस में वही हथियार इस्तेमाल किया गया था, जो अमित शर्मा के मामले में लुधियाना में इस्तेमाल किया गया था। जांच से यह भी उजागर हुआ कि उसी तरह का हथियार फरवरी, 2017 में डेरा सच्चा सौदा (खन्ना) से संबंधित सतपाल कुमार और उनके बेटे की हत्या में इस्तेमाल किया गया। बाद में जुलाई, 2017 में लुधियाना के पादरी सुल्तान मसीह के कत्ल और रविंदर गोसाईं मर्डर में भी इन्हीं हथियारों का प्रयोग हुआ।
पुलिसकर्मियों को पुरस्कार देने की नीति बनाई जाए: कैप्टन
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने डीजीपी को यह निर्देश भी दिए कि इन वारदातों का सुराग लगाने वाली पुलिस टीम और भविष्य में ऐसे अहम सुराग निकालने वाले पुलिस कर्मचारियों को इनाम व सम्मान देने की नीति भी बनाई जाए। कैप्टन ने कहा कि आइएसआइ की नजरें हमेशा देश की अमन-शांति को भंग करने व नौजवानों को गर्मख्याली के रास्ते पर डालने पर हैं। सरकार किसी भी कीमत पर पंजाब की अमन-शांति व सदभावना में विघ्न डालने की इजाजत नहीं देगी।