कनाडा | कनाडा से रिश्तों में तनाव के बीच भारत को कार्यकारी हाई कमिश्नर स्टीवर्ट रॉस व्हीलर समेत 6 कनाडाई डिप्लोमैट्स को देश से निष्कासित कर दिया। उन्हें 19 अक्टूबर की रात 12 बजे तक का समय दिया है। उधर, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा ने भी भारत के 6 डिप्लोमैट्स को देश छोड़कर जाने के लिए कहा है।
इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडा में अपने हाई कमिश्नर संजय कुमार वर्मा को भी वापस बुला लिया है। दरअसल, यह कार्रवाई ट्रूडो सरकार की रविवार को भेजी एक चिट्ठी के बाद हुई। इसमें भारतीय हाई कमिश्नर और कुछ दूसरे डिप्लोमैट्स को कनाडाई नागरिक की हत्या में संदिग्ध बताया था।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने राजदूत को कनाडा से बुलाया, कहा- वहां उनकी सुरक्षा का भरोसा नहीं
हालांकि कनाडाई नागरिक की जानकारी नहीं दी, लेकिन इसे खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके एक दिन बाद भारत ने आज शाम 6 बजे सख्त रुख अपनाया और कनाडाई राजदूत को तलब कर कहा, 'कनाडा ने जो आरोप लगाए हैं, वह आधारहीन हैं।' इसके बाद भारत ने कनाडा में अपने हाई कमिश्नर अन्य डिप्लोमैट्स वापस बुलाने की जानकारी दी।
कनाडा बोला- पर्याप्त सबूत दिए, विदेश मंत्रालय ने कहा- आरोप बेतुके
- भारत में कनाडा के डिप्टी हाई-कमिश्नर स्टूअर्ट व्हीलर ने विदेश मंत्रालय से बाहर निकलने के बाद कहा, 'कनाडा की सरकार ने वो कर दिया है जिसकी मांग भारत लंबे समय से कर रहा था। हमने कनाडा की जमीन पर कनाडा नागरिक की हत्या में भारत के एजेंट्स के शामिल होने से संबंधित पुख्ता सबूत मुहैया करवाए हैं। अब देखना होगा कि भारत इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है। यह दोनों देशों के हित में है। कनाडा सहयोग के लिए तैयार है।
- विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हमें कनाडा की सरकार पर भरोसा नहीं है कि वह हाई कमिश्नर वर्मा को सुरक्षा दे पाएंगे। भारत इन बेतुके आरोपों को सिरे से खारिज करता है। इसके पीछे ट्रूडो सरकार का पॉलिटिकल एजेंडा है, जो कि वोट बैंक से प्रेरित है। कनाडा लंबे समय से ऐसा करते आ रहा है। उनकी कैबिनेट में ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो भारत के खिलाफ चरमपंथी और अलगाववादी एजेंडे से जुड़े हुए हैं। ट्रूडो ने सितंबर 2023 में कुछ आरोप लगाए थे। हालांकि, कनाडा सरकार ने कई बार कहने के बावजूद भारत सरकार के साथ एक भी सबूत साझा नहीं किया है। यह नया आरोप भी ऐसे ही लगाया गया है।
कनाडा पुलिस ने कहा, भारतीय एजेंट्स ने कई जानकारियां जुटाईं
कनाडाई पुलिस के कमिश्नर माइक दुहेमे ने प्रेस कॉन्फ्रेस भी की। कहा, 'कनाडा में भारतीय राजनयिक और अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर गुप्त तरीके से भारत सरकार के लिए जानकारियां जुटाई हैं। इसके लिए भारतीय अधिकारियों ने एजेंट्स का इस्तेमाल किया। इनमें से कुछ एजेंट्स को भारत सरकार के साथ काम करने के लिए धमकाया गया और उन पर दबाव बनाया गया।
उन्होंने बताया कि भारत ने जो जानकारी जुटाई, उसका इस्तेमाल दक्षिण एशियाई लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। हमने भारत सरकार के अधिकारियों को इसके सबूत दिए थे और उनसे हिंसा को रोकने और सहयोग करने की अपील की थी।'
दोनों देशों के बीच तनाव की वजह खालिस्तानी आतंकी निज्जर, पिछले साल हत्या हुई थी
18 जून 2023 की शाम को कनाडा के सरे शहर के एक गुरुद्वारे से निकलते समय निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो ने पिछले साल 18 सितंबर को भारत सरकार पर निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने खारिज किया था।
इसके बाद 3 मई को निज्जर की हत्या के 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ये तीनों आरोपी भारतीय हैं। कनाडाई पुलिस ने कहा कि इन पर पुलिस कई महीनों से नजर रखे हुई थी। उन्हें यकीन है कि इन्हें भारत ने निज्जर को मारने का काम सौंपा था। तब भारत ने इस मामले पर कहा था कि यह कनाडा का आंतरिक मामला है।
ट्रूडो के लिए निज्जर का मुद्दा अहम क्यों
कनाडा में अक्टूबर 2025 में संसदीय चुनाव हैं। खालिस्तान समर्थकों को कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की पार्टी का बड़ा वोट बैंक माना जाता है। हालांकि पिछले महीने ही ट्रूडो सरकार में शामिल खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह की NDP पार्टी ने अपना समर्थन वापस ले लिया है।
गठबंधन टूटने की वजह से ट्रूडो सरकार अल्पमत में आ गई थी। हालांकि 1 अक्टूबर को हुए बहुमत परीक्षण में ट्रूडो की लिबरल पार्टी को एक दूसरी पार्टी का समर्थन मिल गया था। इस वजह से ट्रूडो ने फ्लोर टेस्ट पास कर लिया था। 2021 की जनगणना के मुताबिक, कनाडा की कुल आबादी 3.89 करोड़ है। इनमें 18 लाख भारतीय हैं। ये कनाडा की कुल आबादी का 5% हैं। इनमें से 7 लाख से अधिक सिख है, जो कुल आबादी का 2% हैं।