पटियाला,24 अक्तूबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) पराली के धुएं से गैस चैंबर बनते जा रहे पंजाब में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार खराब होता जा रहा है। सरकारी तंत्र के तमाम प्रयासों के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं बंद नहीं हुई हैं। इसकी तस्दीक पीपीसीबी के वायु प्रदूषण के आंकड़े खुद करते हैं। हालांकि, पीपीसीबी का दावा है कि किसानों में पराली जलाने का रुझान घटा है। पंजाब में धान की कटाई का काम अंतिम चरण में है। राज्यभर में अभी तक पराली जलाने के 9469 मामले सामने आ चुके हैं। पंजाब में करीब 70 फीसद धान की कटाई हो चुकी है। ऐसे में तकरीबन 80 लाख टन से ज्यादा पराली अभी तक जलाए जाने का अनुमान है। पिछले कुछ दिनों के दौरान पराली जलाने के मामलों में वृद्धि हुई है। इससे वायु प्रदूषण का स्तर भी तेजी से ऊपर गया है। दो दिन पहले एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार पंजाब की हवा में आरएसपीएम की मात्रा 329 थी, जो मंगलवार को 351 आरएसपीएम तक पहुंच गई। पीपीसीबी के अनुसार दिवाली से पहले तक जहां राज्य में पराली जलाने के औसतन 400 मामले प्रतिदिन सामने आ रहे थे, वहीं दिवाली के दिन यह आंकड़ा 1100 के पार पहुंच गया था। दिवाली के बाद से पराली जलाने की औसत दर दोगुनी हो गई है। अब 700 से अधिक मामले प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। आम दिनों में भी प्रदूषित हो चुकी पंजाब की हवा धान की कटाई के दिनों में खतरनाक ढंग से जहरीली होती है। राज्य में मंगलवार तक पराली जलाने के 9469 मामले सामने आ चुके हैं। इन किसानों से जुर्माने के तौर पर 18 लाख 42 हजार रुपये वसूल किए गए हैं।
कोट्स
पीपीसीबी का काम मॉनीट¨रग के अलावा सलाह देना व जागरूकता लाना है। पीपीसीबी की टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के लिए काम कर रही हैं। इसका प्रभाव भी पड़ा है। किसानों में पराली जलाने का रुझान कम हुआ है। हालांकि, अभी काफी काम किए जाने की जरूरत है। जब तक किसान खुद पराली जलाने से तौबा नहीं करेगा, तब तक इस भयावह स्थिति से पूरी तरह पार पाना मुश्किल है।
-काहन ¨सह पन्नू, चेयरमैन पीपीसीबी।