जालंधर छावनी,24 अक्तूबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया )कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष राम अवतार के भाई प्रेमनाथ अग्रवाल की पीलिया से मौत के बाद क्षेत्र के लोग जहां भयभीत हैं, वही अब पांव पसार रहे डेंगू ने भी उनके होश उड़ा दिए हैं। मंगलवार सुबह प्रेमनाथ का रामबाग श्मशानघाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनकी मौत के बाद कैंट बोर्ड प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए कैंट के तमाम मोहल्लों में फॉगिंग करवाई। साथ ही कई स्थानों से पानी के सैंपल भी लिए। गौरतलब है कि कैंट मे पिछले 2 माह से पीलिया अपने पांव पसार रहा है और अब तक काबू नहीं किया जा सका है। इस बाबत प्रशासन ने कई स्थानों से पानी के सैंपल भी लिए जो दूषित पाए गए। पीने वाले पानी मे गंदा पानी कहां से मिक्स हो रहा है, इसे बाबत बोर्ड को अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। हालांकि बोर्ड जख्म पर मरहम लगाने के बाबत पेयजल सप्लाई में क्लोरीन की मात्रा बढ़ाता जा रहा है। पीलियाग्रस्त एक सेवानिवृत्त कर्नल की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है। उनका मिलिट्री अस्पताल में उपचार किया जा रहा है।
निजी अस्पताल चला रहे जालंधर के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. अवतार चंद ने बताया कि कैंट में पीलिया के साथ-साथ अब रोजाना डेंगू व टाइफाइड के केस भी बढ़ने लगे हैं।
इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. रघुबीर सिंह रंधावा का कहना है कि मंगलवार को विभाग की टीम कैंट में दौरा करने गई थी। इसके बाद कैंट सीईओ मीनाक्षी लोहिया से मिलने गई लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो पाई।
अधिकांश लेबर गांव गई
पीलिया फैलने के कारण फिलहाल कैंट में काम कर रहे मजदूर अपने गांवों को चले गए हैं। मजदूर रामू व रमेश का कहना है कि यहां पर कई मजदूर पीलिया की चपेट मे आ गये हैं जिनका इलाज में डॉक्टर 5 दिन ग्लूकोज चढ़ाकर करीब 8 से 10 हजार रुपये तक का बिल बना रहे हैं, जो उनके बस से बाहर है। उन्होंने कहा कि कैंट में सरकारी अस्पताल में भी इलाज की उचित व्यवस्था नहीं है।
बोर्ड पूर्व कर्मियों की मदद ले : राम अवतार
बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष राम अवतार अग्रवाल ने कहा कि बोर्ड इतनी गंभीर स्थिति में नॉनटेक्निकल अधिकारी की मदद ले रहा है। उक्त अधिकारी को कैंट में पीने के पाइपों के फैले जाल बाबत एबीसी भी नहीं पता है। अच्छा हो अगर बोर्ड सेवानिवृत्त हो चुके कर्मियों की मदद ले।
भविष्य में भी नहीं फैलेगा पीलिया: सीईओ
इस संबंध में सीईओ मीनाक्षी लोहिया ने कहा कि समस्या से लड़ा जा रहा है। ऐसा कार्य किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी को दूषित पानी ना पीना पड़े। उन्होने कहा कि पानी की मेन पाइप जहां से तमाम मोहल्लों में जा रही है, वहां वॉल सिस्टम लगाया जा रहा है ताकि दूषित पानी कहां से जा रहा है इसका पता लग सके। पहले रिंग सिस्टम था जिससे सारे ट्यूबवेलों का पानी एक साथ घूमता था। यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि दूषित पानी कहां से जा रहा है।