चंडीगढ़ | शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आज सभी फसलों के लिए एमएसपी तय करने की दिशा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का आहवाहन करते हुए कहा कि धान के लिए एमएसपी में 117 रूपये प्रति क्विंटल की मामूली बढ़ोतरी में केंद्र सरकार और स्वामीनाथन आयोग द्वारा अनिवार्य व्यापक लागत और पचास फीसदी लाभ को ध्यान में नही रखा गया है।
अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि हालांकि मूंग और मक्का दोनों की एम.एस.पी में बढ़ोतरी की गई है, लेकिन इन फसलों को एमएसपी पर खरीदने के लिए कोई व्यवस्था नही की गई है। उन्होने कहा, पंजाब के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में किसानों को निजी व्यापारियों की दया पर छोड़ दिया गया है, क्योंकि केंद्र सरकार इन फसलों को एमएसपी पर खरीद नही रही है। उन्होने कहा कि पंजाब के मामले में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि उन्होने मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा अपील करने के बाद एक बड़े रकबे में मूंग बोया था कि इसे एमएसपी पर खरीदा जाएगा,लेकिन सरकार अपने वादे से मुकर गई है।
बादल ने धान की फसल के लिए एम.एस.पी बढ़ाने के तरीके के बारे में बोलते हुए कहा, जमीन की अनुमानित लागत और उसके किराए के मूल्य सहित व्यापक लागत (सी-2) की गणना की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक डोमेन में रखा जाना चाहिए। किसान को सही लगता है कि उनके साथ धोखा किया जा रहा है और अगर सी-2 लागत की सही गणना नही की जाती है तो उन्हे उचित एमएसपी नही मिलेगा, क्योंकि सी-2 आंकड़े पर 50 फीसदी लाभ की गणना की जानी है। उन्होने सभी 14खरीफ फसलों की लागतों के लिए सी-2 प्लस 50 फीसदी लाभ के आंकड़े की गणना करने के लिए एक कमेटी बनाने की वकालत करते हुए कहा कि इस कमेटी में किसान प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होने कहा, अगर यह कमेटी तुरंत बनाई जाती है और उसे अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए समय की सीमा दी जाती है तो सभी खरीफ फसलों के लिए एमएसपी को उचित रूप से संशोधित किया जा सकता है।