-डीपीजी डिग्री कालेज के विद्यार्थियों ने एक माह कक्षा के बदले पूरी फीस वसूलने की कही बात
-छात्रों ने सोमवार को कालेज में प्रबंधन के समक्ष जताया विरोध
-कोरोना के तीसरे फेज को देखते हुए ऑनलाइन परीक्षा की भी मांग
गुरुग्राम, 05 जुलाई। कोरोना महामारी के बीच फीस के मुद्दे पर स्कूलों व सरकार के बीच तो ठनी है, वहीं इसमें अब कालेज भी आ गये हैं। सोमवार को यहां सेक्टर-34 स्थित डीपीजी कालेज में विद्यार्थियों ने फीस व परीक्षा को लेकर कालेज प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराया। अब विद्यार्थी महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में भी कुलपति से मिलकर अपनी पीड़ा बताने जाएंगे।
जानकारी के अनुसार सोमवार को काफी संख्या में डीपीजी इंजीनियरिंग कालेज व डिग्री कालेज के विद्यार्थी कालेज परिसर में एकत्रित हुए। विद्यार्थियों ने यहां कालेज प्रशासन के समक्ष एक महीने पढ़ाई व पूरे साल की फीस वसूलने पर आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही अब आने वाले साल के लिए भी यहां पर फीस जमा कराने को लेकर भी कालेज के फैसले के खिलाफ विद्यार्थी डटे रहे। डिग्री कालेज व इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने बताया कि एक साल में मात्र एक महीने कक्षाएं ऑफलाइन लगी हैं। फिर भी पूरे साल की फीस ली गई। अब अगले सेमेस्टर के लिए भी फीस जमा कराने का दबाव कालेज प्रशासन की ओर से छात्रों पर बनाया जा रहा है। यह सरासर गलत है। प्रबंधन से मुलाकात करने पर छात्रों को एक ही जवाब दिया गया कि यह फीस तो जमा करानी ही पड़ेगी। इसमें किसी भी तरह की कोई छूट नहीं मिलेगी। छात्रों ने प्रबंधन के इस जवाब से असंतुष्टि जाहिर की है।
विरोध का दूसरा विषय था कि यूनिवर्सिटी परीक्षाएं ऑफलाइन कराने की पक्षधर है, जबकि कोरोना महामारी की तीसरी लहर आने वाली है। ऐसे में यह विद्यार्थियों के जीवन के साथ खिलवाड़ होगा। जब कक्षाएं ऑनलाइन लगी हैं तो फिर परीक्षाएं भी यूनिवर्सिटी की ओर से ऑनलाइन ही ली जानी चाहिए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक पारिजात शास्त्री का इस मुद्दे पर कहना है कि फीस व अन्य शिक्षा से जुड़े मामलों को लेकर हम सक्रिय हैं। सरकारी हो या निजी शिक्षण संस्थान, सभी में विद्यार्थियों को जोड़कर और सभी संगठनों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर विरोध जाहिर किया जाएगा। चाहे फीस का मुद्दा हो या परीक्षाओं का, सरकार के समक्ष पूरी ब्यौरा रखकर विद्यार्थियों के हित में काम किया जाएगा।