चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल को किसानों की स्थिति पर मगरमच्छ के आंसू बहाना बंद करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अकाली दल के समर्थन से केंद्र सरकार द्वारा पारित किये खेती ऑर्डीनैंसों ने किसानों की जान सूली पर टाँग दी है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल द्वारा इन ऑर्डीनैंसों, जो स्पष्ट तौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का अंत कर देने की तरफ पहला कदम है, के समर्थन से किसानों के हितों की रक्षा करने के ढकोसले से पर्दा उठा दिया है जबकि इनके शासनकाल के दौरान किसानों की स्थिति खराब हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि सुखबीर को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसकी पत्नी और अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल भी केंद्रीय मंत्री के तौर पर इन ऑर्डीनैंसों की मंजूरी पर मोहर लगाने वाले मंत्रालय में शामिल थी।
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण लेने के लिए सुखबीर बादल द्वारा किसान जत्थेबंदियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की की गई पेशकश की खिल्ली उड़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहाँ से पता चलता है कि सुखबीर बादल जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनजान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऑर्डीनैंस, जिनको शांता कुमार समिति की सिफारिशों पर लाया गया है, भारत के संघीयय ढांचे के पूरी तरह खिलाफ हैं जिसने न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली को खत्म करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि सिफारिशों को ऑर्डीनैंसों पर लागू कर दिया जाता है तो यह अनुमान तर्कसंगत है कि जल्द ही न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म हो जायेगा। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल शिरोमणि अकाली दल के हितों और खास तौर पर निजी और अपनी पत्नी के हितों की रक्षा की खातिर इन तथ्यों को अनदेखा कर रहा है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सुखबीर बादल द्वारा किसानों के प्रति प्यार दिखाने की ड्रामेबाजी करने से अब मसला हल नहीं होगा जबकि दूसरी तरफ उसकी पार्टी अकाली दल द्वारा ऑर्डीनैंसों के हक में सक्रिय हिमायती के तौर पर विचर कर किसानों के हितों को नुक्सान पहुँचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अकाली दल के पास किसान विरोधी और पंजाब विरोधी कदम उठाने के कारण कोई अन्य रास्ता न बचा तो सुखबीर अब इस पेशकश से अपनी छवि बचाने के लिए निराशाजनक कोशिशें कर रहा है।