चंडीगढ़। कोरोना संक्रमण से अभी राहत मिलने के आसार नहीं हैं। इस वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाने के लिए शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन एजुकेशन के विस्तार की योजना बना दी है। अधिकांश सरकारी स्कूलों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में ऑनलाइन एजुकेशन के लिए उनके पास स्मार्ट फोन नहीं हैं। विद्यार्थियों को स्मार्ट फोन मुफ्त में मुहैया करवाने की योजना सरकार बना रही है।
9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को सरकार टेब देने की योजना पर काम कर रही है। प्रदेश के लगभग 12 लाख विद्यार्थियों को ये टेब मिलेंगे। टेब देने की योजना कोविड-19 के प्रभाव से जुड़ी है। दरअसल, सरकार पहले यह देखेगी कि आने वाले महीनों में बीमारी का स्वरूप क्या रहता है। अगर संक्रमण के मामले बढ़ते हैं और स्कूलों को खोलने में खतरा रहेगा तो विद्यार्थियों को घर बैठे पढ़ाई पूरी करने के लिए ये टेब उपलब्ध करवाए जाएंगे।
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शिक्षा विभाग के आला अफसर टेब के लिए खर्चे का अनुमान लगाने में जुटे हैं। ढाई से तीन हजार रुपये के करीब एक टेब पर खर्चा आने की संभावना है। राज्य सरकार की आईटी एजेंसी – हारट्रोन की इसमें मदद ली जाएगी। इन तैयारियों के बीच प्रदेश के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूलों को खोलने के पक्ष में हैं। बेशक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगस्त के बाद ही स्कूल खोलने के संकेत दिए हैं लेकिन वे चाहते हैं कि पहली या फिर पंद्रह अगस्त के बाद स्कूलों को शुरू कर दिया जाए।
गुर्जर का तर्क है कि गांवों में प्राइमरी व आठवीं तक के स्कूलों में स्थानीय गांव के ही बच्चे हैं। ऐसे में पंद्रह-पंद्रह या बीस-बीस बच्चों को रोटेशन आधार पर स्कूलों में बुलाया जा सकता है। इसी तरह से 12वीं तक के स्कूलों में भी अधिकांश तीन से चार ही गांव के बच्चे हैं। ऐसे में कोरोना फैलने का खतरा नहीं है। उनका कहना है कि संक्रमण फैलने का खतरा प्राइवेट स्कूलों में अधिक है। इसलिए प्राइवेट स्कूलों को देरी से खोला जा सकता है। प्राइवेट स्कूलों में दूर-दराज के अलावा शहरों व कई गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं।