चंडीगढ़। हरियाणा के कालाअंब क्षेत्र में करीब नौ दिनों से लापता 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची के एक मकान से बरामद होने का मामला सामने आया है। नोबेल पीस फाउंडेशन की चेयरपर्सन कुसुम भारद्वाज ने दावा किया है कि संस्था की टीम ने बच्ची को रसूलपुर चुग फार्म के पीछे स्थित एक मकान से रेस्क्यू किया।
कुसुम भारद्वाज के अनुसार, बच्ची को उक्त मकान के बाथरूम से बरामद किया गया। उनका कहना है कि रेस्क्यू की पूरी कार्रवाई से संबंधित वीडियो भी संस्था के पास मौजूद है।
संस्था के मुताबिक, रेस्क्यू के बाद बच्ची ने कथित तौर पर उसे बंधक बनाकर रखने और उसके साथ दो बार दुष्कर्म किए जाने के आरोप लगाए हैं। बच्ची ने इस संबंध में एक व्यक्ति पर आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच, बच्ची के बयान, मेडिकल रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि बच्ची एक मजदूर परिवार से संबंध रखती है और उसके माता-पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बच्ची के अचानक लापता होने के बाद परिवार की ओर से उसकी तलाश की जा रही थी। करीब नौ दिन बाद नोबेल पीस फाउंडेशन की टीम द्वारा उसे कथित तौर पर उक्त मकान से बरामद कराया गया।
नोबेल पीस फाउंडेशन का दावा—रसूलपुर चुग फार्म के पीछे एक मकान से सुरक्षित बरामद की गई बच्ची
बंधक बनाकर रखने और दुष्कर्म के आरोप, पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत दर्ज की FIR
नौ दिनों तक बच्ची कहां रही, जांच का विषय
मामले के सामने आने के बाद यह गंभीर सवाल उठ रहा है कि नाबालिग बच्ची नौ दिनों तक कहां रही और वह उक्त मकान तक कैसे पहुंची। जिस मकान से बच्ची को बरामद किए जाने का दावा किया गया है, वहां मौजूद लोगों की भूमिका और बच्ची को वहां रखे जाने की परिस्थितियों की भी निष्पक्ष जांच किए जाने की आवश्यकता है।
वहीं, बच्ची की तलाश और उसकी सुरक्षित बरामदगी को लेकर प्रशासन एवं पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पूरे घटनाक्रम की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाना जरूरी है कि बच्ची के लापता होने से लेकर बरामदगी तक के बीच वास्तव में क्या-क्या हुआ।
POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज
पुलिस द्वारा मामले में POCSO एक्ट के तहत FIR No. 350, दिनांक 12 सितंबर 2026 दर्ज किए जाने की जानकारी है। अब पुलिस जांच में बच्ची के बयान, मेडिकल परीक्षण, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता नाबालिग बच्ची की सुरक्षा, चिकित्सकीय जांच, मानसिक स्वास्थ्य एवं काउंसलिंग सुनिश्चित करना है। साथ ही, जांच के दौरान बच्ची की निजता और गरिमा की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए।
“मामले को रफा-दफा करने का दबाव, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे”—कुसुम भारद्वाज
नोबेल पीस फाउंडेशन की चेयरपर्सन कुसुम भारद्वाज ने आरोप लगाया कि मामले को रफा-दफा करने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामला एक नाबालिग बच्ची की सुरक्षा और न्याय से जुड़ा है, इसलिए किसी भी दबाव के आगे झुकने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि संस्था बच्ची को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव कानूनी और सामाजिक सहयोग जारी रखेगी तथा मामले को किसी भी कीमत पर दबने नहीं दिया जाएगा।
नोबेल पीस फाउंडेशन ने पुलिस एवं प्रशासन से मांग की है कि मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की जाए तथा यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।