डीएलसीसुपवा आवासीय परिसर में पौधरोपण करते कुलगुरु डॉ अमित आर्य।
रोहतक, 23 अगस्त 2026। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के आवासीय परिसर में पौधरोपण अभियान चलाया गया। इसकी शुरुआत कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने पौधरोपण करते हुए की। इस दौरान स्टाफ सदस्यों व छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए करीब 150 पौधे लगाए और उनकी देखभाल का संकल्प लिया।
- स्टाफ व छात्राओं ने 150 फलदार व छायादार पौधे लगाए
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पौधरोपण अभियान की शुरुआत सुपवा के आवासीय परिसर के मुख्य द्वार से की गई। कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने अपनी संस्कृति व परंपरा के अनुसार त्रिवेणी लगाई, जिससें तीन पवित्र व औषधीय पौधे पीपल, नीम व बरगद शामिल रहे। उन्होंने कैंपस की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाने में सहायक रहने वाले पौधे भी इस दौरान रोपे। डॉ अमित आर्य ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। ये हमें शुद्ध वायु, फल, छाया और अनेक प्रकार के प्राकृतिक संसाधन प्रदान करने के साथ ही वातावरण को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अभियान के दौरान डीएलसीसुपवा के आवासीय परिसर, जिसमें कुलगुरु निवास, अहिल्याबाई होल्कर कन्या छात्रावास, फैकेल्टी व स्टाफ निवास आदि के आसपास कतारबद्ध क्रम से खाली स्थानों पर विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पौधे लगाए गए। फलदार पौधों में आम, अमरूद, नींबू, जामुन और आंवला आदि शामिल रहे, जबकि छायादार पौधों में नीम, पीपल, बरगद, अशोक और गुलमोहर जैसे पौधे लगाए गए। पौधों को लगाने के लिए पहले स्थान का चयन किया गया और फिर गड्ढे तैयार करके उनमें खाद एवं उपजाऊ मिट्टी डाली गई। इसके बाद पौधों को सावधानीपूर्वक लगाया गया और उनमें पानी दिया गया।
अभियान में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं ने पौधों की देखभाल करने का संकल्प भी लिया। छात्र-छात्राओं ने एक-एक पौधे की जिम्मेदारी लेते हुए उसे नियमित रूप से पानी देने, उसकी सुरक्षा करने और उसके विकास पर ध्यान देने का प्रण किया। कुलगुरु डॉ आर्य ने छात्रों का आह्वान करते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। इस अवसर पर मौजूद टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ को अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया गया। ताकि, लगातार बढ़ते प्रदूषण, गर्मी और जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई जा सके।