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हरियाणा

हरियाणा पुलिस का साइबर अपराध की रोकथाम के लिए टेक्नोलॉजी-ड्रिवन डिजिटल मॉनिटरिंग मॉडल

Updated on Thursday, August 20, 2026 17:42 PM IST

चंडीगढ़, 20 अगस्त। हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध और ऑनलाइन दुष्प्रचार के खिलाफ अपनी डिजिटल निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करते हुए सोशल मीडिया एवं इंटरनेट पर आपत्तिजनक और गैर-कानूनी गतिविधियों पर प्रभावी शिकंजा कसा है। पुलिस की समर्पित सोशल मीडिया मॉनिटरिंग एवं यूआरएल ब्लॉकिंग टीम द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों पर लगातार निगरानी रखते हुए फिशिंग लिंक, फर्जी वेबसाइट, धोखाधड़ी वाली एप्लीकेशन, भ्रामक विज्ञापन, फर्जी प्रोफाइल तथा अन्य गैर-कानूनी ऑनलाइन कंटेंट की पहचान कर उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा रही है। जनवरी से जुलाई 2026 तक 16,308 अवैध ऑनलाइन कंटेंट/आइटम हटवाए गए हैं।

- 16,308 अवैध कंटेंट हटाए
- सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और यूआरएल ब्लॉकिंग टीम की निरंतर निगरानी से फर्जी वेबसाइट, फिशिंग लिंक, फेक एप्लीकेशन, भ्रामक विज्ञापनों और फर्जी प्रोफाइल पर प्रभावी कार्रवाई जारी


- अपराधियों से एक कदम आगे रहकर तकनीक का उपयोग कर रही हरियाणा पुलिस: DGP अजय सिंघल

डीजीपी हरियाणा अजय सिंघल ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है और अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को निशाना बनाने का प्रयास करते हैं। हरियाणा पुलिस की प्राथमिकता है कि तकनीक का उपयोग अपराधियों से एक कदम आगे रहकर किया जाए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, URL ब्लॉकिंग और ऑनलाइन कंटेंट टेकडाउन के माध्यम से साइबर अपराध, भ्रामक सूचना और गैर-कानूनी डिजिटल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट तथा साइबर फ्रॉड से संबंधित ऑनलाइन सामग्री पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, ताकि नागरिकों के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल वातावरण कायम रखा जा सके।

- डिजिटल अपराध पर हरियाणा पुलिस की पैनी नजर, तकनीक से अपराधियों पर कसा शिकंजा

हरियाणा पुलिस की डिजिटल निगरानी केवल साइबर फ्रॉड तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं फैलाने,आमजन में भ्रम पैदा करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने अथवा आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। एंटी-सोशल तत्वों द्वारा पोस्ट किए गए संदिग्ध एवं भ्रामक कमेंट्स और कंटेंट का सत्यापन करने के बाद संबंधित URL, सोशल मीडिया अकाउंट, एप्लीकेशन और विज्ञापनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाने अथवा उनकी पहुंच प्रतिबंधित करने के लिए कार्रवाई की जाती है। इसके लिए सहयोग पोर्टल सहित निर्धारित माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।

- महिला एवं बाल सुरक्षा पर विशेष फोकस, ऑनलाइन आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ हरियाणा पुलिस की तुरंत कार्रवाई

इसी कड़ी में ऑनलाइन महिला एवं बच्चो के विरुद्ध अपराध यूनिट द्वारा महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित हानिकारक, आपत्तिजनक और गैर-कानूनी ऑनलाइन कंटेंट की विशेष निगरानी की जा रही है। ऐसे कंटेंट की पहचान होते ही संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट कर उसके शीघ्र टेकडाउन की कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न, शोषण एवं आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री से सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। हरियाणा पुलिस का यह टेक्नोलॉजी-ड्रिवन डिजिटल मॉनिटरिंग मॉडल साइबर अपराध की रोकथाम के साथ-साथ फर्जी डिजिटल पहचान, ऑनलाइन धोखाधड़ी, फेक न्यूज और समाज में भ्रम फैलाने वाली गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पुलिस द्वारा डिजिटल स्पेस में अपराधियों की गतिविधियों की पहचान, सत्यापन, रिपोर्टिंग और टेकडाउन की प्रक्रिया को लगातार अधिक तेज और प्रभावी बनाया जा रहा है।

- निरंतर मॉनिटरिंग और धारा 79(3)(b) के तहत तुरंत नोटिस जारी

इस दौरान साइबर टीम रोजाना उन पोस्टों, वीडियो, लिंक और प्रोफाइलों की पहचान कर रही है जिनमें गलत जानकारी, उकसाने वाली भाषा या सार्वजनिक शांति भंग करने वाला कंटेंट शामिल है। जैसे ही ऐसी किसी सामग्री का संज्ञान लिया जाता है, आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी कर उसे तुरंत हटाने की मांग की जाती है।

- अभियान का उद्देश्य—सुरक्षित, जागरूक और भरोसेमंद डिजिटल वातावरण प्रदान करना

एसपी मयंक गुप्ता ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज को सुरक्षित, जागरूक और भरोसेमंद डिजिटल वातावरण प्रदान करना है, ताकि सोशल मीडिया का उपयोग सही दिशा में हो सके। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली मंच है, जिसे जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए तो यह समाज को जोड़ने, जानकारी फैलाने और सकारात्मक बदलाव लाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसी सोच के साथ पुलिस नागरिकों को प्रोत्साहित करती है कि वे जागरूक रहें, सही जानकारी साझा करें और किसी भी संदिग्ध या भ्रामक सामग्री को आगे बढ़ाने से बचें। पुलिस का विश्वास है कि जनता के सहयोग और सतर्कता के साथ यह अभियान और भी अधिक प्रभावी होगा तथा सभी मिलकर एक सुरक्षित और स्वस्थ डिजिटल माहौल बना सकेंगे।

- फर्जी निवेश ऐप्स से सावधान रहें — डीजीपी अजय सिंघल की नागरिकों से अपील

फर्जी इनवेस्टमेंट और ट्रेडिंग ऐप्स के बढ़ते मामलों को लेकर हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों को कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं, और कई लोग उनके झांसे में आकर अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी गंवा बैठते हैं। डीजीपी ने नागरिकों से अनुरोध किया कि किसी भी संदिग्ध ऐप, लिंक या वेबसाइट पर धन का लेन-देन न करें और किसी भी तरह का निवेश करने से पहले उसकी विश्वसनीयता अवश्य जांच लें। उन्होंने यह भी अपील की कि लोग स्वयं जागरूक रहें और अपने आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी के प्रति सतर्क करें। डीजीपी सिंघल ने बताया कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, ताकि समय रहते फ्रॉड की गई राशि को अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर होने से रोका जा सके और अपराधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

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