चंडीगढ़। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई+ (UDISE+) रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा में सुधार के बड़े-बड़े दावे और विज्ञापन तो करती है, लेकिन सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि केंद्र सरकार की रिपोर्ट में सरकारी विद्यालयों के जर्जर भवनों, आधारभूत सुविधाओं की कमी और शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों का उल्लेख किया गया है, तो भाजपा सरकार को यह बताना चाहिए कि पिछले लगभग 12 वर्षों में शिक्षा सुधार के दावे धरातल पर क्यों नहीं उतर पाए। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं और प्रचार से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होती, बल्कि उसके लिए ठोस नीतियों, पर्याप्त संसाधनों और समयबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता होती है।
UDISE+ रिपोर्ट का हवाला देकर राव नरेंद्र सिंह ने जर्जर स्कूलों, शिक्षकों की कमी और बेरोज़गारी पर सरकार को घेरा
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में आज भी हजारों शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। अनेक स्कूल विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के बिना संचालित हो रहे हैं और भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं। सरकार न तो विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ कर पाई है और न ही समय पर नियमित शिक्षक भर्ती सुनिश्चित कर सकी है। इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई, उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और उनके भविष्य पर पड़ रहा है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि जब सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध नहीं होगी तो उसका असर रोजगार पर भी स्वाभाविक रूप से दिखाई देगा। आज हरियाणा का पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी की चुनौती से जूझ रहा है। सरकारी भर्तियों में बड़ी संख्या में युवाओं को अयोग्य घोषित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रदेश का युवा दोषी है, या फिर पिछले लगभग 12 वर्षों से शिक्षा और भर्ती व्यवस्था को कमजोर करने वाली भाजपा सरकार इसकी जवाबदेह है?
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी भर्तियों में न्यूनतम पात्रता के स्तर पर भी बड़ी संख्या में युवा सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए कि इसके पीछे शिक्षा व्यवस्था की कमियां, शिक्षकों की भारी कमी और सरकार की नीतिगत विफलताएं कितनी जिम्मेदार हैं। युवाओं को दोष देने के बजाय सरकार को अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने मांग की कि प्रदेश के जर्जर सरकारी स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, सभी रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र नियमित भर्ती की जाए, प्रत्येक विद्यालय में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा सभी भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार ने तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश की एक पूरी पीढ़ी इसका खामियाजा भुगतेगी। अभी भी समय है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए ठोस सुधार लागू करे, अन्यथा भविष्य में इसकी भारी सामाजिक और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी।