चंडीगढ़। भारत-चीन सीमा पर स्थित गलवान घाटी में हुई मुठभेड़ के दौरान पंजाब के चार जवान शहीद हुए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस शहादत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शहीदों के आश्रितों को नौकरी व मुआवजा देने का ऐलान किया है।
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मुख्यमंत्री ने लद्दाख़ की गलवान घाटी में घटे हिंसक टकराव पर दु:ख ज़ाहिर किया जिसमें इन चार बहादुर सैनिकों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा की ख़ातिर किये बलिदान को कभी भी भुलाया नहीं जायेगा।
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चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा के नज़दीक घटी हिंसक झड़पों में जानें गवाने वाले शहीदों को श्रद्धाँजलि भेंट करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इनके परिवारों को हुए नुकसान का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता और न ही भौतिक चीजों के साथ इसकी भरपाई की जा सकती परन्तु मुआवज़ा और नौकरियां उनकी कुछ दुख तकलीफ़ें घटाने में सहायक होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन शहीदों का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गाँवों में किया जायेगा और इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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उन्होंने संबंधित जिलों के प्रशासन को भी शहीद सैनिकों के शवों को पूर्ण सम्मान के साथ प्राप्त करने के लिए सभी प्रबंध करने के आदेश दिए। सरकार ने चारों शहीदों के एक-एक पारिवारिक सदस्य को नौकरी देने का ऐलान किया है। नायब सूबेदार मनदीप सिंह और नायब सूबेदार सतनाम सिंह के विवाहित होने के कारण सरकार की नीति मुताबिक 12 -12 लाख रुपए का मुआवज़ा दिया जायेगा। मनदीप सिंह पटियाला जि़ले के गाँव सील का निवासी था जबकि सतनाम सिंह गुरदासपुर जि़ले के गाँव भोजराज से संबंधित था।
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इसी तरह दो अविवाहित शहीदों में मानसा जि़ले की तहसील बुढलाडा के गाँव बीरे वाला डोगरा के सिपाही गुरजेत सिंह और संगरूर जि़ले के गांव तोलेवाल के सिपाही गुरबिंदर सिंह के परिवारों को 10 -10 लाख रुपए मुआवज़ा (एक्सग्रेशिया के तौर पर 5 लाख रुपए और ज़मीन के एवज़ में 5 लाख रुपए) दिए जाएंगे। सिपाही गुरबिन्दर सिंह तीन पंजाब रेजीमेंट से सम्बन्धित थे।