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पंजाब

कांग्रेसियों का अराेप, बादलों ने मंत्री पद लेने के लिए पंजाब और पंजाबियों के साथ किया धाेखा

Updated on Wednesday, June 17, 2020 17:45 PM IST

 
केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लगातार पंजाब, किसान, सिख और राज्यों के विरोध में लिए जा रहे फ़ैसलों और अकाली दल द्वारा विरोध की बजाय हिमायत करने के स्टैंड पर अकालियों को घेरते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं और कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि भाजपा द्वारा संघीय ढांचे का गला घोटने के लिए अकाली दल बराबर का हिस्सेदार है।
आज यहाँ जारी साझे प्रैस बयान में कैबिनेट मंत्रियों तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा, सुखजिन्दर सिंह रंधावा, गुरप्रीत सिंह कांगड़, सुखबिन्दर सिंह सुख सरकारिया और बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि केंद्र के किसान विरोधी अध्यादेशों की हिमायत करके सुखबीर बादल ने सिद्ध कर दिया है कि उन्होंने हरसिमरत बादल की केंद्रीय वज़ीरी के लिए अपनी विचारधारा को ही भाजपा के पास गिरवी रख दिया है। उन्होंने कहा कि नए अध्यादेश पूर्ण तौर पर किसान विरोधी हैं, जिसका सबसे अधिक नुकसान कृषि प्रधान राज्य पंजाब को होगा।
कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि इस समय पर अकाली दल की सबसे कमज़ोर, डरपोक और निकम्मी लीडरशिप है, जो केंद्र के किसी भी पंजाब, किसान और सिख विरोधी फ़ैसले के खि़लाफ़ मुँह खोलना तो एक तरफ़ बल्कि सबसे आगे होकर हिमायत करने के लिए तत्पर रहती है। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल आज कौन से मुँह से अकाली दल के प्रधान की हैसियत के तौर पर पंजाब के किसान विरोधी अध्यादेशों की हिमायत कर रहा है। उन्होंने कहा कि अकाली दल और बादल परिवार ने सारी उम्र राज्य के अधिकारों और अपने आप को किसान हितैषी होने के दावों के साथ राजनैतिक रोटियाँ सेकी हैं।
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कांग्रेसी मंत्रियों ने कहा कि पिछले छह साल से मोदी सरकार में जब से हरसिमरत बादल केंद्रीय मंत्री बनी हैं, तब से ही अकाली दल ने भाजपा के समक्ष आत्म-समर्पण कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं जब अकालियों ने भाजपा के पंजाब विरोधी फ़ैसले की हिमायत की हो। इससे पहले जब एन.डी.ए. सरकार अल्पसंख्यक विरोधी कानून सी.ए.ए. लाए तो अकालियों ने उसके हक में वोट डाली। श्री दरबार साहिब अमृतसर समेत गुरूद्वारों के लंगर पर जी.एस.टी. लगाने वाले अकाली दल भाजपा की तकड़ी में तुला। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को ख़त्म करने वाले भाजपा नेताओं के बयान पर भी अकालियों के मुँह बंद हो गए। अब तो हद ही हो गई, जब भाजपा सरकार ने किसान विरोधी अध्यादेश लाया तो अकाली दल इसकी हिमायत पर उतर आया। उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह और पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ ने पंजाब के किसानों की आवाज़ बनकर इन अध्यादेशों का विरोध किया तो सुखबीर बादल भाजपा के पक्ष में हो गया।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि सिखों का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी कहलाने वाली अकाली दल के प्रधान तो उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा सिख किसानों को उजाड़े जाने की रिपोर्टों पर भी चुप हो गया। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी गुजरात की भाजपा सरकार द्वारा पंजाब के किसानों के विरुद्ध लिए गए फ़ैसलों के समय पर अकाली दल मूक दर्शक बनकर रह गया था। उन्होंने कहा कि पंजाबियों को भाजपा पर कोई गिला नहीं क्योंकि वह तो सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी पार्टी है, परन्तु दुख इस बात का होता है कि पंजाबियों के सर पर सत्ता सुख का भोग करने वाली अकाली दल ने भाजपा के किसी भी अल्पसंख्यक और पंजाब विरोधी फ़ैसले का विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि अकालियों को आने वाले समय में इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।
कांग्रेसी मंत्रियों ने किसान विरोधी अध्यादेश के हक में स्टैंड लेने के लिए सुखबीर बादल को पंजाबियों से माफी मांगने को कहा। कोविड-19 संकट के दौरान भी हरसिमरत बादल केंद्र के समक्ष राज्य को कुछ दिलाने की बजाय उल्टा राज्य सरकार की निंदा करने लग गई। उन्होंने अकालियों को डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार का समय याद करवाते हुए कहा कि प्रकाश सिंह बादल जब भी दिल्ली जाते थे, तो कोई न कोई बड़ा प्रोजैक्ट या फंड लेकर आते थे। इसके बावजूद वह पंजाब आकर यू.पी.ए. सरकार के विरुद्ध बोलते थे, परन्तु अब एन.डी.ए. सरकार के भेदभाव भरे सलूक के खि़लाफ़ बादल परिवार क्यों चुप हो गया।
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