चंडीगढ़| देश की आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी गांवों के लिए कोई विशेष दिन समर्पित नहीं था। इस ऐतिहासिक कमी को पूरा करने का श्रेय हरियाणा के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान को जाता है। ग्राम एसोसिएशन ऑफ भारत ने सुनील जागलान के जन्मदिन को राष्ट्रीय गांव दिवस के रूप में मनाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। देशभर के हजारों सरपंचों, प्रधानों और ग्राम सभाओं ने भी इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया है। आज पहली बार उन्नीस जून को उनके जन्मदिन पर राष्ट्रीय गांव दिवस मनाया जा रहा है। यह न केवल एक दिवस है, बल्कि गांव केंद्रित विकास की नई क्रांति की शुरुआत है।
सुनील जागलान का जन्मदिन पहला राष्ट्रीय गांव दिवस के रूप में मनाया जाएगा
सुनील जागलान विगत सोलह वर्षों से देश के दस हजार से अधिक गांवों की यात्रा कर चुके हैं। एक साधारण सरपंच से शुरू हुई उनकी पंचायत यात्रा आज गांवों को संवैधानिक दर्जा दिलाने के संघर्ष में बदल चुकी है। वे अकेले भारतीय कार्यकर्ता हैं जो वर्षों से गांवों को संविधान में उचित स्थान दिलाने के लिए निरंतर आवाज उठा रहे हैं। बीबीपुर में सरपंच के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सौ से अधिक अभियान चलाए। देश की पहली डिजिटल पंचायत, महिला हितैषी पंचायत, बाल हितैषी पंचायत, लाडो पंचायत, गाली बंद घर अभियान, पीरियड चार्ट अभियान और बेटी के नाम पर नेमप्लेट जैसे अनूठे प्रयास किए। इनमें बेटी के साथ सेल्फी अभियान ने वैश्विक पहचान बनाई और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जनजागरण का सबसे प्रभावी माध्यम साबित हुआ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उनकी इस पहल की दस बार से अधिक विभिन्न मंचों पर सराहना की है। उनकी पंचायत यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री सनराइज को राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दूरदर्शन के सीरियल सलाम इंडिया में उनकी जीवन गाथा को विशेष रूप से दिखाया गया। उनकी यात्रा और योगदान को अंतरराष्ट्रीय बोर्ड की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है। देश और दुनिया के प्रमुख समाचार पत्रों में उनके कार्यों की निरंतर चर्चा रही है।
जागलान का दृढ़ विश्वास है कि गांव कोई समस्या नहीं, गांव ही समाधान है। गांव की समझ के बिना भारत अधूरा है। शहरी युवा, खासकर नई पीढ़ी, अपनी जड़ों से कट रहे हैं। राष्ट्रीय गांव दिवस इसी खाई को पाटने का माध्यम बनेगा। इस दिन युवा अपनी मिट्टी, संस्कृति, संघर्ष और संभावनाओं को समझेंगे। गांव मजबूत होंगे तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। नीति निर्माताओं को भी इस दिन गांवों की समस्याओं और क्षमताओं का आईना दिखेगा।
देश भर के सरपंचों, ग्राम सभाओं और ग्राम एसोसिएशन ऑफ भारत ने सुनील जागलान के जन्मदिन को राष्ट्रीय गांव दिवस घोषित करने का संकल्प लिया है। यह फैसला गांवों की नई जागृति का प्रतीक है। उन्नीस जून अब केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि उस मिट्टी के प्रति कृतज्ञता का दिन होगा जो भारत की आत्मा है।
सुनील जागलान कहते हैं, जब तक व्यक्ति के अंदर गांव का स्पर्श नहीं होगा, वह भारत को समझ ही नहीं सकता। इस दिवस के साथ उम्मीद है कि गांव अब आंकड़ों की फाइलों में सिमटकर नहीं रहेंगे, बल्कि देश के दिलों में बसेंगे। गांवों को मजबूत करने वाली यह क्रांति विकसित भारत की नींव बनेगी।
यह नई गांव क्रांति नई पीढ़ी में भी गांव के स्पर्श को जागृत करेगी और विकसित भारत के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाएगी।