गांव रिठाल फौगाट की चौपाल में प्रदर्शित डीएलसीसुपवा के छात्रों की कला को देखने पहुंची महिलाएं।
27 मई 2026, रोहतक। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के छात्रों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए गांव रिठाल फौगाट की चौपाल को आर्ट गैलरी के रूप में तब्दील कर दिया। यह सुपवा के मास्टर इन विजुअल आर्ट्स के फाइनल ईयर के छात्रों की मेहनत रही, जो उन्होंने बातचीत, स्मृति व समुदाय से कला की मुलाकात कराई।
गांव रिठाल फौगाट की चौपाल में प्रदर्शित डीएलसीसुपवा के छात्रों की कला को देखती महिलाएं।
दरअसल, छह छात्रों हर्षुल शंकर, ज्योति, किरण सिंह, निखिल फौगाट, रश्मि, सोनी ने मिलकर गिल्ड कलेक्टिव शीर्षक के तहत गांव की चौपाल को ही आर्ट गैलरी का रूप दिया है। आर्ट गैलरी की शुरुआत मंगलवार शाम को हुई, जो तीन दिन तक जनता के लिए ओपन रहेगी। इसमें तीन दिन तक अलग-अलग आर्टिस्ट की टॉक रहेगी, लोग छात्रों द्वारा प्रदर्शित कला को निशुल्क देख सकेंगे। इसके साथ ही आर्टिस्ट्स के साथ इंटरेक्शन सेशन रहेगा, जबकि शाम के समय अलग-अलग फिल्मों की स्क्रीनिंग रहेगी। पहले दिन अमन पूनिया निर्देशित फिल्म चूल्हा न्योंदा की स्क्रीनिंग की गई। आर्ट गैलरी में छात्रों ने अपनी ड्राइंग, पेंटिंग, फोटोग्राफी, इंस्टालेशन, प्रिंट, वीडियो, स्कल्पचर आदि आर्ट का प्रदर्शन किया है।
- मास्टर इन विजुअल आर्ट्स फाइनल ईयर के छात्रों का दिखा हुनर
- पहली बार शहर की बजाए किसी गांव तक पहुंची आर्ट गैलरी
सुपवा की विजुअल आर्ट्स फैकेल्टी के एफसी विनय कुमार के अनुसार गांव की पारंपरिक चौपाल को संवाद, कहानी सुनाने व सामूहिक मिलन का स्थान माना जाता है। उसी से प्रेरित होकर छात्रों ने यह प्रदर्शनी चौपाल में लगाई है। इसका थीम भी यही रखा है। यह पहला मौका है, जब आर्ट गैलरी बनाने के लिए किसी शहर की बजाए गांव का चयन किया गया है। अन्यथा, अधिकतर कलाकार आर्ट एग्जीबिशन के लिए बड़े शहरों का ही चयन करते हैं। उन्होंने बताया कि छात्रों की आर्ट गैलरी जीवंत सांस्कृतिक साझा स्थान में बदली हुई नजर आई। विजुअल आर्ट्स, परफॉर्मेंस आर्ट, फिल्म स्क्रीनिंग, कलाकार वार्ता, कविता पाठ व सामूहिक समुदाय इंटरेक्शन के माध्यम से बनी आर्ट गैलरी ग्रामीण पहचान, समकालीन रचनात्मकता व साझा सार्वजनिक स्थानों के बीच बदलते संबंध से परिचय कराती नजर आती है। इसमें छात्रों ने अपनी पढ़ाई के दौरान सीखी विभिन्न कलाओं को ग्रामीणों के अवलोकन के लिए प्रदर्शित किया है। इसके क्यूरेटर शरद व विनय केडी हैं।
गांव रिठाल फौगाट की चौपाल में प्रदर्शित डीएलसीसुपवा के छात्रों की कला को देखने पहुंचे बच्चे।
डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने कहा कि विजुअल आर्ट्स के छात्रों का प्रयास सराहनीय है। शहर की बजाए गांव की चौपाल को आर्ट गैलरी का रूप देने से पता चलता है कि छात्र समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं। ग्रामीणों के लिए अपनी कला का प्रदर्शन करना नेक कार्य है। भविष्य में ये छात्र यूनिवर्सिटी व प्रदेश का नाम रोशन करेंगे, यह उम्मीद है।