नामकरण के बाद डीएलसीसुपवा के गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग।
रोहतक, 26 मई 2026। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के गर्ल्स हॉस्टल को अब अहिल्याबाई होल्कर के नाम से जाना जाएगा। अहिल्याबाई ने महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया। अब उनके नाम से हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को प्रेरणा मिलती रहेगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने गर्ल्स हॉस्टल परिसर के मुख्य द्वार व हॉस्टल बिल्डिंग की एंट्री पर नया नाम लिखवा दिया है।
रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा के अनुसार कुलगुरु डॉ अमित आर्य की सोच थी कि गर्ल्स हॉस्टल का नामकरण किसी ऐसे महापुरुष के नाम पर किया जाए, जो शिक्षा के प्रति समर्पित रहा हो। जिसने अपने जीवन में आदर्श स्थापित किए हों। जिसके नाम से छात्राएं प्रेरणा लेकर अपने जीवन में आगे बढ़ सकें। ऐसे में विभिन्न नाम पर विचार किया गया, जिसमें अहिल्याबाई होल्कर के योगदान को देखते हुए उनके नाम पर छात्रावास का नामकरण करने का फैसला लिया गया। डॉ मनोचा ने बताया कि गर्ल्स हॉस्टल का उद्घाटन 4 फरवरी 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया था। उसके बाद से अभी तक इसका नामकरण नहीं हुआ था।
- महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए किया संघर्ष
- छात्राओं को मिलती रहेगी उनके नाम से प्रेरणा : कुलगुरु
कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने बताया कि अहिल्याबाई होल्कर (1725-1795) मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध महारानी रही। कम उम्र में पति के देहांत के बाद उन्होंने अपने राज्य की बागडोर संभाली और इंदौर को राजधानी बनाकर कुशल शासन किया। उन्होंने अपने शासन के दौरान न्यायप्रियता, प्रजा कल्याण व प्रशासनिक दक्षता के नए आयाम स्थापित किए। उनका जीवन त्याग, धर्म व जनसेवा के आदर्शों पर आधारित रहा। अहिल्याबाई ने महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने और महिला सशक्तिकरण के लिए जीवन भर प्रयास किया। उनके कार्यों ने महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत प्रदान किया और समाज में उनके योगदान को अमर बना दिया। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को हमेशा उनके नाम से प्रेरणा मिलती रहेगी।