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हरियाणा

यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए हरियाणा में 91 एसटीपी कार्यरत: मुख्यमंत्री

Updated on Friday, April 24, 2026 19:59 PM IST

चंडीगढ़, 24 अप्रैल- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि साल 2027 के अंत तक यमुना नदी में एक भी बूंद गंदे पानी की न जाए। इसके लिए सभी विभाग मिलकर तेजी से कार्य करें और जहां आवश्यकता हो वहां नए औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी), सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तथा सामान्य अपशिष्ट उपचार केंद्र (सीईटीपी) लगवाए जाएं।

 

मुख्यमंत्री ने यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की

 

यमुना कैचमेंट एरिया में 5 साल में 41 एसटीपी लगाए, 11 नए एसटीपी का निर्माण प्रक्रियाधीन

 

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित एक बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यमुना में जाने वाले पानी को शुद्ध करने के लिए यमुना कैचमेंट एरिया में 1543 एमएलडी क्षमता के 91 एसटीपी संचालित किए जा रहे हैं जिनमें से 593 एमएलडी क्षमता के 41 एसटीपी पिछले 5 साल में तैयार करवाए गए हैं। आवश्यकता अनुसार 11 नए एसटीपी तैयार करवाए जा रहे हैं जिससे जलशोधन क्षमता बढ़ जाएगी।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन जे गणेशन ने बैठक में बताया कि कुछ औद्योगिक इकाइयों द्वारा खर्च बचाने के लिए औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र चलाए नहीं जा रहे हैं और दूषित पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि कई स्थानों पर औद्योगिक इकाइयों द्वारा दूषित अपशिष्ट को टैंकरों के माध्यम से गांवों के तालाबों में छोड़ने के मामले भी सामने आए हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक उद्योग अपने यहां उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल को संशोधित करके ही नालों में छोडे़ं। नियमों की अवहेलना करने वाले उद्योगों पर कार्यवाही की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना तक जाने वाली सभी 11 प्रमुख ड्रेनेज पर सामान्य अपशिष्ट उपचार केंद्र (सीईटीपी) स्थापित करवाए जाएं ताकि उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल की प्रत्येक बूंद उपचारित होकर ही यमुना नदी में जाए। इसके लिए आवश्यकता अनुसार सीएसआर की राशि भी खर्च की जा सकती है।

 

मुख्यमंत्री ने बताया कि यमुना कैचमेंट एरिया में 147.5 एमएलडी क्षमता के 8 नए सीईटीपी लगाए जाएंगे। इनमें फरीदाबाद के प्रतापगढ़, मिर्जापुर व बादशाहपुर में, गुरुग्राम के सेक्टर 18, सेक्टर 34 व सेक्टर 37 में तथा पानीपत के सेक्टर 29 व सोनीपत के कुंडली में सीईटीपी लगाया जाएगा। यमुनानगर के परवालू में 19.5 एमएलडी के एक संयंत्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलशोधन संयंत्रों के लिए जमीन अधिग्रहण व अन्य निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरे करवाए जाएं। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में कुछ ड्रेन के माध्यम से 211 एमएलडी अनुपचारित जल हरियाणा आता है जिसे हरियाणा द्वारा उपचारित करके वापस दिल्ली भेजा जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में दिल्ली की मुख्यमंत्री के साथ बैठक करके इस मामले का समाधान करवाया जाएगा कि दिल्ली द्वारा यमुना में केवल उपचारित जल ही डाला जाए।  बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, अनुराग अग्रवाल, विजेंद्र कुमार, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन जे. गणेशन तथा सदस्य सचिव योगेश कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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