डेराबस्सी। शिरोमणि अकाली दल के कोषाध्यक्ष तथा ट्रेड एवं व्यापार विंग के प्रदेश अध्यक्ष एन के शर्मा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को शिक्षा के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा है कि पिछले चार वर्षों के दौरान 120 से अधिक स्कूलों को बंद करवाना ही पंजाब की आम आदमी पार्टी की बड़ी उपलब्धि और शिक्षा का मॉडल है।
आज यहां जारी एक जानकारी में एन के शर्मा ने कहा कि पांच वर्ष कांग्रेस के तथा चार वर्ष आम आदमी पार्टी की सरकार के कार्यकाल शिक्षा के लिए बेहद खराब समय रहा है। शर्मा ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि वर्ष 2002 से लेकर 2007 तक कांग्रेस की सरकार के समय में शिक्षा के क्षेत्र में कुल 9 हजार 936 करोड़ रुपये खर्च किए गए और पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 14वें रैंक पर था। इसके बाद सत्ता में आई अकाली दल सरकार के समय में कुल 55 हजार 672 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि अकाली दल की सरकार के कार्यकाल के दौरान 13 नए विश्वविद्यालय, 30 नए कालेज, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, आईआईटी,
297 स्किल सेंटर, 10 मेरिटोरियस स्कूल, माई भागो अकादमी, महाराजा रणजीत सिंह अकादमी बनी, दलित बच्चों को स्कॉलरशिप, 4 लाख 82 हजार बच्चों को साइकिल, 146 ब्लाक में आदर्श स्कूल खोलने के अलावा 80 हजार अध्यापकों की भर्ती की गई। शर्मा ने कहा कि आज शिक्षा विभाग का रिकॉर्ड उपलब्ध है जिसके अनुसार वर्ष 2007 से लेकर 2017 तक प्रदेश में 4467 नए स्कूल बने। अकाली दल की सरकार के समय में 27 विद्यार्थियों पर एक अध्यापक था और आज 47 विद्यार्थियों पर एक अध्यापक है। पंजाब में सेवानिवृत्ति के बाद नए अध्यापकों की भर्ती नहीं की जा रही है।
अकाली नेता ने कांग्रेस व आप सरकार को दी शिक्षा पर बहस की चुनौती बादल सरकार ने स्कूल बनाए कांग्रेस ने स्मार्ट स्कूल तो आप ने स्कूल ऑफ एमिनेंस के बोर्ड लगाए
अकाली नेता ने कहा कि उसके बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने उन्हीं स्कूलों के बाहर स्मार्ट स्कूल के बोर्ड लगाकर पंजाब के लोगों को गुमराह किया और अब आम आदमी पार्टी ने उन्हीं बोर्ड को बदलकर स्कूल ऑफ एमिनेंस लिख दिया है।
एन के शर्मा ने कहा कि प्रदेश में 2431 स्कूल ऐसे हैं जहां 76 हजार बच्चों पर एक-एक अध्यापक है। वर्ष 2024 25 में 80 हजार बच्चे सरकारी स्कूलों को छोड़ चुके हैं। पिछले नौ वर्षों के भीतर न तो न स्कूल, बनाए गए हैं और न ही स्कूलों में कमरे, शौचालय, बुनियादी ढांचा मजबूत किया गया है। पंजाब में 44 प्रतिशत सीनियर सेकेंडरी स्कूल ऐसे हैं जहां प्रिंसिपल नहीं हैं। 50 प्रतिशत एलीमेंट्री स्कूलों में मुख्य अध्यापक नहीं हैं।