चंडीगढ़, 25 फरवरी। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला में पंचकर्म टेक्निशियन सर्टिफिकेट कोर्स के बैच 2025-26 का इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित किया गया। संस्थान के डीन प्रभारी प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने विधिवत रूप से दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत की। इंडक्शन प्रोग्राम के संयोजक एवं कोर्स इंचार्ज डॉ. अनुराग कुशल ने डीन प्रभारी और उप चिकित्सा अधीक्षक (डीएमएस) को पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने बताया कि आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब पमनानी के मार्गदर्शन में नए पाठ्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। पंचकर्म टेक्निशियन कोर्स शुरू होने से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ के युवाओं के लिए आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से जुड़ने के नए अवसर मिलेंगें।
एनआईए में पंचकर्म टेक्निशियन कोर्स के इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन पंचकर्म टेक्निशियन बैच 2025-26 के विद्यार्थियों को दिए गए रोगियों के साथ अच्छा व्यवहार करने का मंत्र
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह चिकित्सा पद्धति केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि पुनरुत्थान की वैज्ञानिक प्रक्रिया मानी जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, प्रदूषण, अनियमित खानपान और मानसिक तनाव के कारण विश्वभर में जीवनशैली संबंधी रोगों में दिन प्रतिदिन वृद्धि हो रही है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, अनिद्रा और अवसाद जैसी समस्याओं के बीच लोग प्राकृतिक उपचार की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसे में पंचकर्म एक सुरक्षित, प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। इंडक्शन प्रोग्राम में प्रोफेसर प्रह्लाद रघु और एडीओ सतपाल एसवाल ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।