चंडीगढ़। शिरोमणी अकाली दल ने आज ज्ञानी हरप्रीत सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि वह प्रेम सिंह चंदूमाजरा के इस इकबालिया बयान पर सफाई देनी चाहिए कि उनके (ज्ञानी हरप्रीत सिंह) की अगुर्वा में अकाली दल को बांटने और एक अलग गुट बनाने की साजिश स्वर्गीया सुखदेव सिंह ढ़ींडसा के आवास पर सभी अकाली विरोधी नेताओं की मौजूदगी में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा 2 दिसंबर 2024 का फरमान सुनाए जाने से बहुत पहले रची गई थी।
शिरोमणी अकाली दल ने ज्ञानी हरप्रीत को चंदूमाजरा के बयान पर सफाई देने की चुनौती दी, जिसमें उन्होने स्वीकार किया कि 2 दिसंबर को तख्त के आदेश से पहले सुखदेव सिंह ढ़ींडसा के आवास पर अकाली दल को तोड़ने और एक अलग धड़ा बनाने की साजिश रची गई
वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि ज्ञानी हरप्रीत ने अपने कार्यों से श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा का उल्लंघन किया है इसीलिए उन्हे तख्त के सामने तलब किया जाना चाहिए
चंदूमाजरा ने कल लोंगोवाल में अपने सार्वजनिक भाषण में स्पष्ट रूप से कहा था कि सरदार सुखबीर सिंह बादल को अकाली दल अध्यक्ष के पद से हटाने, पार्टी को विभाजित करने और ज्ञानी हरप्रीत सिंह को नवां चूल्हा दल का अध्यक्ष बनाने की पूरी योजना स्वर्गीय ढ़ींडसा के आवास पर पर बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि यह सब सुरजीत सिंह रखड़ा, बीबी जागीर कौर और परमिंदर सिंह ढ़ींडसा की उपस्थिति में किया गया था और इस मकसद के लिए ढ़ींडसा ने ज्ञानी हरप्रीत को इस काम के लिए चंडीगढ़ बुलाया था।
यहां पार्टी के मुख्य कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अकाली दल के वरिष्ठ नेता स. महेशइंदर सिंह ग्रेवाल, डाॅ. दलजीत सिंह चीमा, अमरजीत सिंह चावला, सरबजीत सिंह झिंझर ने जत्थेदार साहिब अकाल तख्त साहिब से प्रो. चंदूमारा के ‘‘ अनजाने में दिए गए कबूलनामे’’ का संज्ञान लेन की अपील की, जिसमें उन्होने ढ़ींडसा को नए ग्रुप की अगुवाई ज्ञानी हरप्रीत सिंह को जिम्मेदारी देने की बात की, जिसे हाल ही में औपचारिक रूप दिया गया है।
नेताओं ने इसे अकाल तख्त साहिब के साथ एक बड़ा विश्वासघात करार देते हुए कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह, नए राजनीतिक मोर्चे के गठन संबंधी बातचीत लेने के लिए उसी समय ढ़ींडसा के आवास पर गए थे, ज बवह सरदार सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ इन्हीं नेताओं द्वारा दायर शिकायत पर फैसला सुना रहे थे। उन्होेने ज्ञानी हरप्रीत से यह बताने के लिए कहा कि क्या उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को इस दौरे और उन्हें दी गई लीडरशीप के प्रस्ताव के बारे में उन्होने सूचित किया था। नेताओं ने कहा कि ज्ञानी हरप्रीत को अब यह साफ बताना चाहिए कि क्या उन्होने ढ़ींडसा के घर अकाली दल को कमजोर करने के लिए रची गई साजिश को व्यावहारिक रूप दिया थे।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए सरदार महेशइंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि ज्ञानी हरप्रीत अब पंथ के गददार हैं और उन्हे सिंह साहिब कहलाने का हक नही है। उन्होने कहा कि जिस तरह नवां चूल्हा दल के नेताओं ने ज्ञानी हरप्रीत को ढ़ींडसा के घर पर बुलाकर साजिश रची थी। उसी तरह ज्ञानी हरप्रीत ने भी अकाली दल अध्यक्ष के खिलाफ दर्ज शिकायत में सह-साजिशकर्ता बनकर घोर पाप किया और अकाल तख्त साहिब की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई और इसकी ‘मर्यादा ’ का उल्लंघन किया है। उन्होने कहा,‘‘ ज्ञानी हरप्रीत को तख्त के सामने बुलाकर उन्हें पंथ दा दोखी घोषित करने का यह उपयुक्त मामला है।’
डाॅ दलजीत सिंह चीमा ने पूरी साजिश को उजागर करने और पंथ के सामने सच्चाई लाने के लिए चंदूमाजरा का आभार व्यक्त किया और जोर देकर कहा कि वाहेगुरु में विश्वास जताते हुए कहा कि उनकी कृपा से सच की जीत होगी। उन्होने यह भी बताया कि कैसे चंदूमाजरा ने मनप्रीत सिंह अयाली का भी पर्दाफाश किया था , जिन्होने सिर्फ अकाल तख्त साहिब के आदेश पालन करने का सिर्फ दिखावा ही किया था क्योंकि ‘‘ सुधार लहर’’ का नाम का सुझाव अयाली ने ही दिया था। उन्होने कहा कि ज्ञानी हरप्रीत के नवां चूल्हा दल के अध्यक्ष पद की दौैड़ से खुद को बाहर करने के बाद की पूरी नौटंकी का चंदूमाजरा के सार्वजनिक बयान ने पर्दाफाश कर दिया ।