चंडीगढ़। सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा 20 अगस्त 2025 को स्नेहलया, मलोया में प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य विभिन्न विभागों के समन्वय, समुदाय की भागीदारी तथा नवाचारी पद्धतियों को अपनाकर केंद्र शासित प्रदेश में ECCE सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर विचार करना था। इस बैठक की अध्यक्षता सामाजिक कल्याण विभाग की सचिव अनुराधा चगटी ने की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधियों, अभिभावकों तथा क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी की।
प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) पर परामर्श बैठक
चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि 0–6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का समग्र विकास अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह मस्तिष्क विकास का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। विचार-विमर्श में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया:
• पर्याप्त पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना
• आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्रिय और जीवंत ECCE हब के रूप में सशक्त करना
• आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का क्षमता निर्माण
• नवीन शिक्षण–अधिगम सामग्री का परिचय
• बाल विकास में समुदाय की भागीदारी
• गुणवत्तापूर्ण ECCE सेवाओं के लिए निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली का विकास
इस अवसर पर सामाजिक कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती अनुराधा चगटी ने ECCE के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा: “प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा, बच्चे के भविष्य की सबसे मजबूत नींव रखती है। प्रारंभिक वर्षों में उचित पोषण, देखभाल और सीखने के अवसर प्रदान करके हम न केवल बच्चों का उज्ज्वल भविष्य गढ़ते हैं बल्कि समाज और राष्ट्र में दीर्घकालिक निवेश भी करते हैं। विभागों के बीच प्रभावी समन्वय और समुदाय की सक्रिय भागीदारी इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि ECCE केंद्रों को बाल-मैत्रीपूर्ण, समावेशी एवं गतिविधि-आधारित बनाया जाए, ताकि हर बच्चा, विशेषकर वंचित वर्गों के बच्चे, विकास और सीखने के समान अवसर प्राप्त कर सकें। बैठक में विभिन्न विभागों और NGOs ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए, जिनमें समुदाय की भागीदारी के नवाचारी मॉडल, प्रारंभिक शिक्षा के लिए डिजिटल उपकरण तथा स्वास्थ्य–पोषण–शिक्षा के एकीकृत हस्तक्षेप शामिल थे। लाभार्थियों (अभिभावकों) ने भी संवाद सत्र के दौरान ECCE पाठ्यक्रम को और बेहतर बनाने के सुझाव दिए। बैठक का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि विभागीय समन्वय, अंतःक्षेत्रीय सहयोग और समुदाय की सहभागिता से ही ECCE सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं परिणामकारी बनाया जा सकता है। सामाजिक कल्याण विभाग ने आश्वासन दिया कि बैठक में प्राप्त सुझावों को भविष्य की योजना और क्रियान्वयन में शामिल किया जाएगा, ताकि चंडीगढ़ का हर बच्चा जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत प्राप्त कर सके।