चंडीगढ़, 6 मई। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के किसानों से अपील की है कि वे जिस प्रकार आने वाली पीढ़ी के लिए अपनी जमीन को विरासत के रूप में छोड़ कर जाते हैं, उसी प्रकार पानी को भी विरासत मान कर चलें, तभी जमीन भावी पीढ़ी के लिए उपयोगी होगी, इसके लिए आज से राज्य सरकार द्वारा ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना की घोषणा की गई है, जिसके तहत इस सीजन में धान के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसल बोने वाले किसानों को 7 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि योजना के पहले चरण में 19 ब्लॉक शामिल किए गए हैं जिनमें भू-जल की गहराई 40 मीटर से ज्यादा है। इनमें से भी आठ ब्लॉक में धान की रोपाई ज्यादा है जिनमें कैथल के सीवन और गुहला, सिरसा, फतेहाबाद में रतिया और कुरुक्षेत्र में शाहाबाद, इस्माइलाबाद, पिपली और बबैन शामिल हैं। इसके अलावा वह क्षेत्र भी योजना के दायरे में होंगे जहां 50 हार्स पावर से अधिक क्षमता वाले ट्यूबवेल का इस्तेमाल किया जा रहा। मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, तिल, कपास, सब्जी की खेती कर सकते हैं। जिन ब्लॉक में पानी 35 मीटर से नीचे है, वहां पंचायती जमीन पर धान की खेती की अनुमति नहीं मिलेगी। इसमें पेहवा, थानेसर, जाखल, पटौदी और फतेहाबाद शामिल हैं। अन्य ब्लॉक के किसान भी धान की खेती छोडऩा चाहते हैं तो वे इसके लिए आवेदन कर सकते हैं उन्हें भी अनुदान मिलेगा।