लुधियाना, 22जुलाई: शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज ग्राम पंचायतों से अपील की है कि वे आम आदमी पार्टी की 40 हजार एकड़ जमीन हड़पने की योजना को सफल नही होने देने के लिए प्रस्ताव पारित करें कि वे एक इंच जमीन भी अधिग्रहित नही होने देंगें। अकाली दल अध्यक्ष ने यहां डी.सी आॅफिस लुधियाना के बाहर एक विशाल ‘धरने’ को संबोधित किया, जिसमें हजारों लोग खराब मौसम और भारी बारिश होने के बावजूद राज्य में आप सरकार द्वारा राज्य में उपजाउ जीमन के जबरन एक्वायर करने के विरोध में विशाल प्रदर्शन किया। अकाली दल अध्यक्ष ने पूरी 40 हजार एकड़ जमीन एक्वायर योजना को तत्काल रदद करने की मांग की है। उन्होने कहा कि अकाली दल जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन को तेज करते हुए साप्ताहिक धरने आयोजित करेगा, और पहला धरना 28 जुलाई और 4 अगस्त को होगा।
‘‘सुखबीर तेरी सोच ते पहरा देयांगे ठोक के’’ के जोशीले नारों के बीच सरदार सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि दिल्ली के बिल्डरों के साथ मिलकर काम कर रहे आप संयोजक अरविंद केजरीवाल का इस लूट के पीछे हाथ है, जिन्हे उनकी इच्छा के अनुसार बड़ी जमीन देने का वादा किया गया था। उन्होने चीफ सेक्रेटरी, जिन्हे सभी विकास प्राधिकरणों का प्रधान बनाया गया है , उन्हे और उनके मैंबरों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें राज्य में जमीन एक्वायर की जाने वाली प्रक्रियाओं में की जा रही अवैधता के लिए उन्हे जवाबदेह ठहराया जाएगा।
कहा कि अरविंद केजरीवाल द्वारा शुरू की गई जमीन हड़पने की योजना को कभी भी सफल नही होने देंगें, आप सरकार को एक इंच जमीन भी एक्वायर नही करने देंगें
भारी बारिश के बावजूद हजारों लोग जबरन जमीन अधिग्रहण अभियान का विरोध करने के लिए एकत्र हुए
कहा कि पार्टी 28 जुलाई और 4 अगस्त को बठिंडा में धरना देगी
इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि आप सरकार ने केंद्रीय जमीन अधिग्रहण अधिनियम,2013 के बजाय पुराने राज्य जमीन अधिग्रहण अधिनियम,1995 के तहत लुधियाना में 24हजार एकड़ सहित 40 हजार एकड़ जमीन एक्वायर करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होने कहा कि 1995 के कानून में जमीन के टुकड़ों को अधिग्रहण और पटटे से बाहर रखने के साथ साथ सत्तारूढ़ सरकार की इच्छा के अनुसार जमीन की नीलामी यां आवंटन की अनुमति दी गई थी। उन्होने कहा,‘‘ इससे भ्रष्टाचार के रास्ते खुलेंगें और चुनिंदा टुकड़ों को नीलामी से बाहर रखा जा सकेगा। इसके ठीक विपरीत, केंद्रीय भूमि अधिग्रहण, अधिनियम 2013 में पुनर्वास योजना के अलावा क्लेकटर दर से चार गुना मुआवजा देने की बात कही गई है।’’ उन्होने कहा कि राज्य जमीन अधिग्रहण अधिनियम, 1995 के माध्यम से जमीन एक्वायर करने का कदम राज्य विधानसभा में पारित नही हुआ था, जो अपने आप में अवैध और असंवैधानिक बनाता है।
सरदार बादल ने कहा कि इस नए अधिग्रहण के तहत सबसे ज्यादा नुकसान छोटे किसानों को होगा, ‘‘ जिनके पास 50 एकड़ जमीन है, उन्हे 60 फीसदी जमीन वापिस मिलेगी और जिनके पास 9 एकड़ जमीन है , उन्हे केवल 33 फीसदी ही वापिस मिलेगा। इसके अलावा अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद किसानों को जमीन बेचने, उस पर कर्जा लेेने यां जमीन उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) कराने की अनुमति नही दी जाएगी।’’
वरिष्ठ अकाली नेता डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में इस पाॅलिसी को सही ठहराने की कोशिश की थी। उन्होने कहा कि अगर यह नीति किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी तो मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि उन्होने इस पर हस्ताक्षर करने से इंकार क्यों कर दिया और दिल्ली की आप सरकार पर उन्हे विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद से हटाकर यह पद चीफ सेके्रटरी को देने के लिए मजबूर क्यों किया।
इस अवसर पर अकाली दल अध्यक्ष ने 2015 में हुई बेअदबी की घटनाओं पर भी बात करते हुए कहा कि 2014 में राज्य में आप सरकार के आगमन के बाद ही पंजाब में बेअदबी की घटनाएं शुरू हुई। उन्होने कहा कि बेअदबी के मुददे का इस्तेमाल आप और कांग्रेस दोनों ने अकाली दल को बदनाम करने के लिए किया ताकि अकाली दल के परचम को रोका जा सके, 2017 में लगातार तीसरी बार राज्य में जीत जाता। उन्होने कहा कि इन तत्वों ने बेअदबी के मामलों को राज्य स्तर पर जांच नही होने दही और मांग की कि इन्हें सीबीआई को सौंप दिया जाए। उन्होने कहा,‘‘ हमने मामले को सीबीआई को सौंप दिया जिनसे कांग्रेस ने वापिस ले लिया। उस समय से ही काग्रेंस और आप दोनों ही इस संवेदनशील मुददे पर राजनीति कर रहे हैं , जबकि अपराधी सरेआम खुले घूम रहे हैं।’’ उन्होने कहा कि इसके विपरीत अकाली दल ने मोगा और मलेरकोटला बेअदबी के दोनों मामलों की तह तक पहुंचकर , जो राज्य के पास रह गए थे, दोनों मामलों में जांच करके दोषी ठहराना सुनिश्चित किया।
सरदार बादल ने कहा कि कैसे आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने विधायक नरेश यादव का भरपूर समर्थन किया, जिनपर मलेरकोटला बेअदबी का आरोप लगाया गया था। उन्होने कहा,‘‘ आप सरकार ने शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत वापिस लेने के लिए मजबूर किया गया और शिकायत वापिस लेने के बावजूद, बाद में दोषी ठहराए गए । उन्होने कहा कि केजरीवाल ने यादव को महरौली से पार्टी का टिकट फिर से दे दिया। यह सब केवल यह साबित करता है कि बेअदबी की घटनाओं में आप नेताओं का हाथ था। अकाली दल की सरकार बनने के बाद इसकी तह तक जाकर अपराधियों को सजा दी जाएगी।’’
धरने में मौजूद वरिष्ठ नेताओं में हीरा सिंह गाबड़िया, महेशइंदर सिंह ग्रेवाल, एन.के शर्मा, शरणजीत सिंह ढ़िल्लों, रंजीत सिंह ढ़िल्लों, भूपिंदर सिंह भिंदा, एस.आर,कलेर, परमजीत सिंह ढ़िल्लों, गुरचरण सिंह ग्रेवाल, तीर्थ सिंह महला, सनी गिल, चांद सिंह डल्ला, सरबजीत सिंह झिंझर, कमल चेतली, आर.डी.शर्मा, जसपाल सिंह ग्यासपुरा, मनजीत सिंह मदनीपुर बलविंदर सिंह सिद्धू, परउपकार सिंह घुम्मण, बाॅबी गरचा, हितेश ग्रेवाल और जसकरण दिओल भी मौजूद थे।