Health

हार्ट अटैक मरीजों में 33 फीसदी बनिया समुदाय के लोग:डॉ.कलेर

February 15, 2021 08:24 PM

गुरुग्राम। आपको यह जानकर हैरानी होगी देश में होने वाले हृदय रोगियों में सर्वाधिक संख्या बनिया समुदाय के लोगों की है। अन्य जातियों के लोग इस मामले में पीछे हैं। इसका मुख्य कारण इस समुदाय लोगों को लाइफ स्टाइल है। एक स्टडी के आधार पर यह दावा फोर्टिस मैमोरियल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष पद्यम भूषण सम्मानित डाक्टर टीएस कलेर ने किया।
उन्होंने कहा कि कोरोनरी धमनी की बीमारी, जो दिल का दौरा पडऩे का कारण बनता है, भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। समुदाय और जातीयता के विश्लेषण में बानिया समुदाय के बीच सीएडी की व्यापकता सबसे अधिक पायी गयी है।
अपने 32 वर्ष के अनुभव के आधार पर उन्होंने बताया कि इस समुदाय के बहुत कम लोग धूम्रपान व शराब आदि का इस्तेमाल करते हैं। इसके उलट इस समुदाय के लोगों में मीठा खाने की आदत, तला भूना खाने की आदत तथा ज्यादा समय तक बैठे रहना हार्ट अटैक का मुख्य कारण माना गया है। उन्होंने करीब बीस हजार लोगों पर की गई स्टडी के आधार पर बताया कि दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, पंजाब व उत्तर भारत में कोरोनरी धमनी की बीमारी के 33 फीसदी मरीज बनिया समुदाय (अग्रवाल,जैन, गुप्ता) आदि शामिल हैं।

पहली बार हुआ हार्ट अटैक पर जातिगत सर्वे


इस मामले में बीस फीसदी रोगियों के साथ दूसरे नंबर पर पंजाबी समुदाय के लोग आते हैं। पंजाबियों में खान-पान के अलावा शराब का सेवन तथा धूम्रपान के अलावा नियमित व्यायाम न करना भी मुख्य कारण है। इसके अलावा ब्राह्मण 15 प्रतिशत किसान तथा मुस्लिम दस-दस प्रतिशत इस बीमारी के रोगी पाए गए हैं।

पदम् भूषण डाक्टर कलेर ने कहा कि बनिया समुदाय में सीएडी, एनजाइना और दिल के दौरे का प्रचलन सबसे अधिक देखा  गया है। यह उनकी गतिहीन जीवन-शैली के कारण हो सकता है।  कलेर के अनुसार कोरोनरी हृदय रोग, जो दिल के दौरे का कारण बनता है, भारत में हृदय रोग से चार में से एक मौत का कारण है। यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि किसी व्यक्ति का व्यवसाय और जीवनशैली उसके दिल के दौरे से पीडि़त होने की संभावना पर सीधा प्रभाव डालता है।
डॉ.कलेर के अनुसार दिल का दौरा पडऩे के मुख्य कारण धूम्रपान, व्यायाम की कमी, गतिहीन जीवन शैली, भारी शराब का सेवन, तनाव, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल के अलावा बीमारी को लेकर परिवारिक इतिहास भी मुख्य कारण हो सकता है।
24 घंटे तक ही कारगर होती है इंजीयोप्लास्टी
फोर्टिस मैमोरियल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष पद्यम भूषण सम्मानित डाक्टर टीएस कलेर ने कहा कि सीने में दर्द को गैस का अटैक समझकर हलके में नहीं लेना चाहिए। अगर दस से पंद्रह मिनट तक सीने में दर्द हो रहा है और पसीना आने लगे तो यह हार्ट अटैक हो सकता है। ऐसे में पीडि़त को फौरी प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल ले जाना अनिवार्य है। क्योंकि एंजीयोप्लास्टी भी 24 घंटे तक ही कारगर होती है।

 
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