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Haryana

आतंकवादियों के विरुद्ध मजबूत दीवार बनकर खड़े हुए थे आइएएस एमएल वर्मा और उनका परिवार

January 31, 2024 08:47 PM

चंडीगढ़| हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एमएल वर्मा एक ऐसा नाम है, जिनका जिक्र आते ही न केवल मुख्यमंत्री के कार्यों के प्रति समर्पित निष्ठावान अधिकारियों की याद आने लगती है, बल्कि आतंकवाद के दौर में एसवाईएल नहर बनाने के लिए सरकार की ओर से किए जाने वाले प्रयासों में अधिकारियों की गंभीर भूमिका की याद दिलाती है। करीब 32 साल पुराना घटनाक्रम है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल के अतिरिक्त प्रधान सचिव एमएल वर्मा का गोलियों से सीना छलनी कर आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी।

चंडीगढ़ से यमुनानगर जाते हुए गोलियों से भून डाला था एमएल वर्मा, उनकी पत्नी, दो बेटों व गनमैन व चालक को
पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव के नाते एसवाईएल व राजधानी चंडीगढ़ की पैरवी से नाराज से आतंकी
पूरे प्रदेश में मनाया जाएगा बलिदानी दिवस, मुख्य कार्यक्रम का आयोजन छछरौली के गांव ललहाड़ी कलां में होगा


केवल एमएल वर्मा पर आतंकवाद का यह कहर नहीं टूटा। उनका पूरा परिवार इस अभागे, अप्रत्याशित और दर्दनाक हादसे का शिकार हुआ। एक फरवरी 1992 को 32 साल पहले आतंकवादियों के इस हमले में स्वयं एमएल वर्मा, उनकी धर्मपत्नी प्रीति वर्मा, बेटे गौरव और सौरभ बलिदानी हो गए थे। इस हमले में एमएल वर्मा के ड्राइवर राजबीर सिंह तथा गनमैन सतवीर सिंह की भी मृत्यु हो गई थी। आतंकवाद का वह ऐसा दौर था, जब इस घटना के बाद पूरी सरकार हिल गई थी। राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ प्रशासनिक गलियारों में आतंकवाद और आतंकवादियों के विरुद्ध जबरदस्त आक्रोश था। लेकिन होता वही है, जो होनी को मंजूर होता है।
एमएल वर्मा मूल रूप से यमुनानगर जिले के गांव ललहाड़ी कलां के रहने वाले थे, जो तब की छछऱौली विधानसभा में पड़ता है। एमएल वर्मा के छोटे भाई संजीव वर्मा हरियाणा की भाजपा सरकार में रोहतक के मंडलायुक्त के पद पर कार्यरत हैं, जिन्होंने विभिन्न विभागों और पदों पर रहते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सोच व नीति के अनुरूप भ्रष्टाचारियों को एक के बाद एक कई बार बेनकाब करने का काम किया। संजीव वर्मा को अपने दिवंगत भाई एमएल वर्मा के स्थान पर एचसीएस की नौकरी मिली थी, लेकिन अपनी कार्यप्रणाली, सरकारी नीतियों को धरातल पर लागू करने तथा लोगों में जबरदस्त स्वीकार्यता होने की वजह से संजीव वर्मा लगातार चर्चाओं में बने रहे। आइएएस के पद पर उनकी पदोन्नति हुई। एचसीएस और आइएएस सेवा में आने से पहले संजीव वर्मा अपने गांव के सरपंच भी रहे हैं।
 
हरियाणा के कई जिलों में दिवंगत आइएएस एमएल वर्मा के शुभचिंतक और समर्थक मौजूद हैं, जो हर साल उनकी पुण्यतिथि मनाकर उनकी सेवाओं तथा समर्पण को याद करते हैं। मुख्य कार्यक्रम यमुनानगर के ललहाड़ी गांव में होता है, जहां आज भी पूरे दिवंगत परिवार की याद में स्मारक मौजूद हैं। आतंकवादी आइएएल एमएल वर्मा से एसवाईएल नहर और राजधानी चंडीगढ़ सरीखे अहम मामलों की पैरवी करने से नाराज थे। चूंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल उन पर बहुत भरोसा करते थे और सरकार की तरफ से तमाम मामलों की पैरवी के अधिकार उन्हें दे रखे थे, इसलिए उन्हें निर्णय लेने की भी स्वतंत्रता थी, जो उनके विरोधियों के साथ आंतकियों को रास नहीं आ रही थी।
रोहतक के मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने बताया कि उनके भाई एमएल वर्मा और उनके पूरे परिवार पर आतंकवादियों ने एक फरवरी 1992 को घात लगाकर उस समय हमला किया था, जब वह अपने पैतृक गांव यमुनानगर जिले के छछरौली स्थित ललहाड़ी कलां जा रहे थे। आतंकवादियों ने उन पर हमला शहजादपुर में गांव कक्कडमाजरा के निकट किया था। चलती गाड़ी में पूरे परिवार पर आतंकियों ने गोलियों की बौछार कर दी थी, जिसमें पूरा परिवार बलिदानी हो गया था। ललहाड़ी कलां में एमएल वर्मा और उनके परिवार का बलिदानी स्मारक है, जहां हर साल उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। इस वर्ष भी उनके शहीदी स्मारक पर पैतृक गांव ललहाड़ी कलां में शहीदी दिवस कार्यक्रम का आयोजन होगा। पूरे राज्य में अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर एमएल वर्मा, उनके परिवार, गनमैन तथा चालक को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

 

 
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