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सांकेतिक भाषा केवल बधिरों की ही नहीं, सभी की भाषा बने-राज्यपाल

September 04, 2021 01:44 PM

- राज्यपाल ने गुरूग्राम के मूक-बधिर निशक्तजन कल्याण केन्द्र में दो परियोजनाओं का उद्घाटन तथा एक का किया शिलान्यास ।

चंडीगढ़, 3 सितंबर। हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने आज कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा के अलावा, सांकेतिक भाषा अर्थात् साइन लैंग्वेज सिखाने व सीखने पर बल दिया गया है। यह सांकेतिक भाषा केवल बधिरों की ही नही बल्कि सभी की भाषा बने।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मूक-बधिर निशक्तजनों को नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने आईएसएल अर्थात् इंडियन साइन लैंग्वेज को भाषा के रूप में मान्यता देकर बधिर लोगों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के हितों का ध्यान रखते हुए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं जिनके तहत उन्हें कौशल विकास में प्रशिक्षण देने के साथ साथ माइक्रो लोन स्कीम में लाभ दिलवाया जा रहा है। इसके अलावा, नौकरियों में दिव्यांगजनों को दिए जाने वाले आरक्षण को भी 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया है। उन्हें पेंशन भी दी जा रही है।
वे आज गुरूग्राम के श्रवण एवं वाणी निशक्तजन कल्याण केन्द्र का अवलोकन करने आए थे। इस दौरान उन्होंने इस केन्द्र में दो परियोजनाओं नामतः बहुउद्देश्यीय हॉल तथा प्रथम तलीय स्कूल विंग का उद्घाटन तथा ‘नींव आधार भवन‘ का शिलान्यास किया। बहुउद्देश्यीय हॉल का नाम केन्द्र के संस्थापक डा. बी एन चक्रवर्ती के नाम पर रखा गया है। कल्याण केन्द्र का अवलोकन करने के दौरान उन्होंने डिजीटल साईन लैंग्वेज लैब तथा अर्ली इंटरवेंशन सैंटर का भी निरीक्षण किया और इनकी मदद से श्रवण एवं वाणी निशक्तजनों को दी जा रही शिक्षा के बारे में जानकारी हासिल की। 
 
 
 
 
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