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गुरुग्राम में बालक मितांश ने अपने साथ अपनी साइकिल का भी मनाया जन्मदिन

संजय कुमार मेहरा | August 02, 2022 12:07 PM

गुरुग्राम में अपनी साइकिल का जन्मदिन मनाते हुए आरती करता बालक मितांश।

 

-साइकिल की सजावट करके पूजा, आरती भी की
-आजादी के अमृत महोत्सव के तहत साइकिल पर तिरंगा भी लगाया

गुरुग्राम। साइकिल की सवारी ने जिंदगी का मतलब समझाया-कई बार गिरकर उठना भी सिखाया, उस खुशी का अंदाजा मत लगाओ-जो मुझे साइकिल चलाने में आया। साइकिल के प्रति कुछ इसी तरह की दीवानगी है बालक मितांश में। अपने जन्मदिन की पूर्व संध्या पर मितांश ने अपनी साइकिल का भी जन्मदिन मनाया। उसकी सजावट की। कलावा भी बांधा और फिर पूजा-अर्चना की।

अशोक विहार फेज-3 निवासी विनय कुमार एवं पूनम सहराय के बेटे मितांश का साइकिल प्रेम इतना गहरा है कि उसने अपनी साइकिल का ही जन्मदिन मनाया। यह साइकिल उसे ठीक एक साल पहले उसके जन्मदिन पर माता-पिता की ओर से गिफ्ट में मिली थी। आज के दौर में जहां बच्चे इंटरनेट की दुनिया से जुड़कर महंगी बाइक और कारों के शौकीन हो रहे हैं, वहीं मितांश ऐसे सब बच्चों से अलग साइकिल का कद्रदान है। स्कूल वाले दिन वह शाम के समय और छुट्टी वाले दिन अलसुबह उठकर वह साइकिल चलाने की इच्छा पूरी करता है।

 

मितांश के लिए साइकिल सिर्फ घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि फिटनेस का भी माध्यम है। साइकिलिंग करके मितांश अपने दोस्तों को भी फिटनेस का संदेश देता है। मितांश का मतलब प्रिय मित्र होता है। इसलिए वह अपने नाम के मुताबिक सबसे बहुत अधिक प्यार करता है। साइकिल के प्रति मितांश की इस तरह की सोच को संस्कारों से भी जोड़ा जा सकता है। उसके भीतर एक साइकिल के प्रति इतना भावनात्मक जुड़ाव और रिश्ता है। यही बातें वर्तमान के साथ भविष्य में भी उसके भीतर रिश्तों की नींव को मजबूत करेगी।

आजादी के 75वें साल में देश आजादी का अमृत महोत्सव भी इस साल मना रहा है। इसी अभियान से प्रेरित मितांश ने अपनी साइकिल पर तिरंगा झंडा लगाकर देशभक्ति भी दिखाई है। दूसरों को अपने घरों, वाहनों पर तिरंगा लगाने के लिए जागरुक करने का भी उसका यह एक तरीका है। मितांश कहते हैं कि हर हाल में हमें अपने देश से प्यार होना चाहिए। देश के प्रति सम्मान होना चाहिए। अपने तिरंगे का हम सबको सम्मान करना है। तिरंगे के नीचे ही हमारा अस्तित्व है। हमें अपनी सोच भी ऊंची रखनी है और अपना झंडा भी ऊंचा रखना है।

बेटे के तिरंगे और साइकिल के प्रति पे्रम को लेकर मितांश की मां श्रीमती पूनम सहराय कहती हैं कि यह सब गुण उसमें गॉड गिफ्टिड हैं। परिवार के प्रति भी वह बहुत गहराई से सोचता है। अभी से ही उसमें परिवार में एकता बनाए रखने की जो सोच है, वह इस उम्र के बच्चों में कम ही दिखाई देती है। बहुत ही गहराई के साथ परिवार के सुख-दुख की समझ उसमें अभी से है। मितांश की उम्र भले ही छोटी हो, लेकिन वह सपने और सोच बड़ी रखता है।

 
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