Haryana

हरियाणा में बदले राजनीति के मायने आया राज ‘मनोहर’

May 04, 2022 05:16 PM
"कुछ लोग थे जो वक्त के सांचे में 'ढल' रहे हैं, कुछ लोग हैं जो वक्त के सांचे 'बदल' रहें हैं..." जी हाँ हम बात कर रहे हैं ऊर्जा से ओतप्रोत और हरियाणा के शासन में शुचिता युक्त नवाचार के प्रणेता माननीय मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहर लाल जी की। आज उनके जन्मदिवस के अवसर पर कुछ ऐसा प्रतीत हो रहा मानो हरियाणा मुख्यमंत्री जी के साथ निरंतर युवा और ऊर्जा से लबरेज होकर आगे बढ़ रहा है। 
नित-नई योजनाओं से हरियाणा देश का अनुकरणीय प्रदेश बन चुका है।  26 अक्तूबर 2014 में जब प्रदेश के चौथे लाल यानि मनोहरलाल ने सत्ता संभाली थी। तभी से लोगों की निगाहें इस बात पर टिक थी कि क्या वे भी तीन लालों की श्रेणी में आएंगे या नहीं? बीते सात साल के शासन का आंकलन किया जाए तो ध्यान में आता है कि मनोहर लाल, हरियाणा की राजनीति में मुस्कराता चेहरा है, जो परिणाम की बुनियाद पर अपने वजूद की पैमाइश देता है। 
ऐसा आत्मविश्वास है, जो भ्रष्ट व्यवस्था को जड़ से उखाड़ने और हाथिये पर गए समाज को नई ताकत दे रहा है। जो सिस्टम को योजनाबद्ध तरीके से ठीक करने का आमादा रखता है। इसलिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी का स्वभाव सरल और दयालु है। उनके अन्दर स्वार्थ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष, कपट, बेईमानी आदि कुप्रवृतियों का नामोनिशान नहीं है। उनके रास्ते में रोड़े अटकाने और उनके लिए बाधा उत्पन्न करने वालों के प्रति भी उनका व्यवहार बेहद सौम्य है।

 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के जन्मदिन (5 मई) पर विशेष

 

उनके विराट व्यक्ति को उनके ही कथन से स्पष्ट समझा जा सकता है, जब वे कहते हैं कि 'समाज के अंतिम व्यक्ति को अगर हम सामुहिक प्रयास से सुखी बनाएंगे तो समाज अपने आप समृद्ध बन जाएगा। इसलिए योजनाएं ऐसी बनानी चाहिए, जिससे समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी लाभ हो'।
5 मई, 1954 को रोहतक के निदाणा गांव के किसान हरबंस लाल खट्टर के घर जन्मे मनोहर लाल अपने बाल्यकाल से गरीबों के संवदेनशील रहे। परिवार में सबसे बडे होने के बावजूद होने उन्होंने अविवाहित रहकर समाज-सेवा को अपना जीवनपथ बनाया और अपना पूरा सामाजिक जीवन गरीब, वंचित, पिछडे और शोषित वर्ग को समर्पित कर दिया।
सामाजिक जीवन के दौरान उनके यमुनानगर, भिवानी के परिचित साथी कहते हैं कि मनोहर लाल जी ने न जाने कितने गरीब युवाओं को स्कूल-कॉलेज की दहलीज पर पहुंचाया, फीस भरी और उन्हें काबिल बनाया। ये  अच्छाईयां उनके शासनकाल में विभिन्न रूप में दिखाई देते हैं। जिसके कारण आज उन्हें लोग "राजनीति में संत" की संज्ञा देते हैं। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष के नेतागण भी उनके कार्यशैली के मुरीद हैं।
मुख्यमंत्री के रूप में उनकी सरकार को गठित हुए साढे सात साल हो चुके है। इन सालों में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही थी कि उनका शासन पूरी तरह भ्रष्टाचार से मुक्त रहा है। संगठन के साधारण जीवन से सक्रिय राजनीति में कदम रखने के बाद भी उन्होंने कभी स्वयं को नहीं बदला। बल्कि वे व्यवस्था को परिवर्तन करने वाले वाहक बनते चले गए। सात पहले जब वे पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे थे, तो उन्होंने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि उनकी सरकार पूरी ईमानदारी और बिना भेदभाव के काम करेगी। 
इस बात पर वे आज भी कायम है। असल में यह एक सैद्धान्तिक विचार था, जो मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश के सामने रखा था। इस पर अमल करने के लिए सरकार ने ऐसी योजना व नीतियां बनाई, जिससे आज आम लोगों को लगता है कि मनोहर सरकार गरीबों की सरकार है। वास्तव में यह कार्य आसान नहीं था क्योंकि प्रदेश अपने स्थापना काल से जिस क्षेत्रवाद, जातिवाद और वंशवाद की तरफ चल रहा था, उसकी जड़ें काफी नीचे थी। मुख्यमंत्री ने अपनी टीम को साथ लेकर चरणबद्व तरीके से भ्रष्ट नीतियों को जड़ से उखाड़ दिया। बीते एक साल से सरकार परिवार पहचान पत्र को लेकर गंभीरता से काम कर रही है।
भारतीय संस्कति में रंगे-बसे होने के कारण मुख्यमंत्री मनोहर लाल परिवार व्यवस्था को स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाना चाहते है। परिवार पहचान पत्र(पीपीपी) इसी सोच का नतीजा है। पीपीपी से न केवल गरीब व्यक्ति को विभिन्न नागरिक केंद्रित सेवाओं की स्वचालित प्रदायगी सुनिश्चित करेगा, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाएगा। प्रत्येक परिवार के लिए 14 अंकों का आईडी नंबर दिया गया है।
अब तक प्रदेश में लगभग 64 लाख परिवार हैं, जिन्होंने अभी तक परिवार पहचान पत्र को अपनाया है। अब इन परिवारों को व्यक्तिगत योजनाओं के तहत लाभ पाने के लिए बार-बार दस्तावेज जमा कराने की जरूरत नहीं पडेगी। पिछले दिनों पीपीपी मॉडल के सफल क्रियान्यवन के कारण 26 हजार बुजुर्गों को स्वत: पेंशन मिलनी शुरू हो गई। मुख्यमंत्री की ईमानदार कार्यशैली ने आम लोगों को बिजली के बिल भरने के लिए जाग्रत किया। जिसके कारण लाइन-लाॅस कम हुआ और आज प्रदेश के 5500 गांवों में 24 घंटे आ रही है। 
पूरानी सरकारों में नियम-कायदों को ताक पर रखकर पिछले दरवाजे से अपने चहेतों को नौकरियां देकर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। इस कुव्यवथा से आम युवा कुंठित था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने युवाओं को इस निराशा के भंवर से निकालने का काम किया है। बीते सात सालों में 80 हजार से ज्यादा युवाओं को योग्यता के आधार पर नौकरी देकर संदेश दिया कि अब युवाओं को नौकरी के लिए किसी सिफारिश की जरुरत नहीं पड़ेगी। खुद किसान पुत्र होने के कारण उन्होंने किसान का साथ कभी नहीं छोडा। प्रदेश का किसान अंचभित हुआ, जब पहली बार किसी सरकार ने फसल खराब होने पर किसानों को 30 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा। 
मुख्यमंत्री की साफ नीति व नीयत देख आज प्रदेश का किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गहरी रूचि लेता है। महिला सुरक्षा पर मुख्यमंत्री मनोहर का विजन जितना साफ व स्पष्ट है, वह पुरानी सरकारों में दिखाई नहीं दिया। इजराइल की तर्ज पर प्रदेश में आपातकालीन स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा व स्वावलंबन के लिए डायल-112 कारगर साबित हुई है। मुख्यमंत्री ने हर ब्लॉंक स्तर पर महिला थाना, स्कूल-कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे, बलात्कार जैसा घिनौना अपराध पर फांसी की सजा और दुर्गा शक्ति जैसे अभियान चलाकर राजनीति में सामाजिक दायित्व का नया अध्याय जोड़ा है।
भले उन्होंने गृहस्थ जीवन में प्रवेश न किया हो। लेकिन, एक पिता की भांति उन्होंने सदा बेटियों की सुरक्षा की चिंता की। बीते सालों में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाकर उन्होंने एक नेक पिता का फर्ज निभाया। जिसके कारण प्रदेश के माथे पर कन्या भ्रूण हत्या करने का कंलक भी धूल गया है। उनका यह फर्ज सैनिक परिवारों के प्रति भी दिखाई देता है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शहीद सैनिकों के 300 आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर सरकारी नौकरी और 50 लाख की आर्थिक सहायता की गई।
मनोहर सरकार पार्ट-1 में पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता और वर्तमान सरकार में महिलाओं को आगे बढाने की उनकी नीयत ने आम आदमी को कायल बना दिया है। भले ही मामला अभी न्यायालय में विचारधीन है। लेकिन, पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण की पैरवी ने देश की अन्य सरकारों को सोचने पर मजबूर किया है।
पुरानी सरकारों की विकास के मामले में भेदभाव व क्षेत्रवाद की नीति अब कोसों दूर चली गई है। मुख्यमंत्री ने न कभी हलकों में कोई भेद किया, न विकास के नाम पर कोई भेदभाव। "हरियाणा एक-हरियाणवी एक" के मूल मन्त्र को लेकर सरकार ने पूरे प्रदेश को समान विकास की राह पर अग्रसर है। पहली बार किसी सरकार ने ई-गर्वेनस के जरिए से व्यवस्था को मजबूत करने का काम किया है। 
तबादलों के नाम पर होती दलाली को बंद कर मनोहर सरकार ने ऑनलाइन तरीका अपनाया, जिसके कारण शिक्षकों को कम्प्यूटर के एक क्लिक से मनपसंदीदा स्टेशन मिल जाता है। ई-पीडीएस सिस्टम होने से लोगों को उंगुठा लगाकर राशन मिल रहा है। प्रदेश सरकार की महत्वकांशी स्वामित्व योजना की चर्चा सर्वत्र है, जिससे अंग्रेजों के काल से जारी लाल डोरा सिस्टम खत्म होगा। साथ ही जमीन पर होने वाले झगड़े खत्म होंगे, हर गरीब को उनकी जमीन का मालिकाना हक भी मिलेगा। ग्राम दर्शन पोर्टल जैसी योजनाओं को अब गांव में बैठा हर व्यक्ति अपने बहुमूल्य सुझाव सरकार तक पहुंचा सकेंगे। सीएम विंडो घर बैठे लोगों को अपनी समस्या मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का माध्यम बनी है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल युवाओं की शक्ति से वाकिफ है। इसलिए वे प्रदेश के युवाओं को कौशलयुक्त बनाने पर लगातार जोर दे रहे है। साथ ही युवा उर्जा के संवर्धन के लिए सभी गांवों में योग एवं व्यायामशाला खोलना चाहते है। इसी युवा सोच का नतीजा है कि अब प्रदेश में 511 व्यायामशाला शुरू हो चुकी है। जबकि प्रदेश में 26 नये खेल स्टेडियमों का निर्माण कार्य चल रहा है। गर्व की बात है कि मुख्यमंत्री की अगुवाई में पहली बार हरियाणा खेलों इंडिया-2021 की मेजबानी करेगा। इंफास्ट्रचर के क्षेत्र में हरियाणा लगातार मजबूत हो रहा है। वह दिन दूर नहीं, जब हर जिले से कोई न कोई राजमार्ग गुजरेगा।
बीते सात सालों में प्रदेश में 1070 किलोमीटर लंबे 17 राष्ट्रीय राजमार्गों की घोषणा हुई। गरीब व जरूरतमंद परिवार को आयुष्मान भारत के साथ जोडना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता रही। परिणामस्वरूप प्रदेश में 22 लाख गोल्डन कार्ड बनाए गए। जबकि पौने दो लाख से ज्यादा रोगियों का करीब 150 करोड़ रुपये से मुफ्त इलाज भी हुए।  
लोगों को घर बैठे ही मुफ्त चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए ई-संजीवनी ओपीडी की शुरूआत भी हरियाणा से हुई है। हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की मनोहर सोच देश भर में नाजिर बनी है। अंत में मेरा मानना है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सोच के सच्चे वाहक हैं। क्योंकि केंद्र सरकार की अधिकांश योजनाओं को शत-प्रतिशत लागू करने का काम अकेली हरियाणा सरकार ने किया है। स्वयं प्रधानमंत्री जी कई बार सार्वजनिक रूप से भी मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल जी की खुले मन से प्रशंसा कर चुके हैं। मैं भी मुख्यमंत्री जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देता हूं। ईश्वर, उन्हें अनंत काल तक ऊर्जान्वित रखें और प्रदेश उनके निर्देशन में सदैव उन्नति पथ पर अग्रसर रहे।
 
-अशोक छाबड़ा
मीडिया कोऑर्डिनेटर
(मुख्यमंत्री) हरियाणा 


 
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