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दिनभर किसानों के कब्जे में रहा करनाल, प्रशासन लाचार

September 07, 2021 09:12 PM


चंडीगढ़, 7 सितम्बर। करनाल में लाठीचार्ज के दौरान साथी की मौत से गुस्साए किसानों का मंगलवार को दिन भर शहर की सडक़ों पर कब्जा रहा। करनाल में जहां तक नजर दौड़ाई जा रही थी वहां तक किसानों और पुलिस के अलावा कोई नहीं थी। दिनभर तनावपूर्ण माहौल के बीच किसानों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया और देरशाम पुलिस द्वारा की गई बैरिकेडिंग तोडक़र लघु सचिवालय में पहुंच गए।
करनाल में बीती 28 अगस्त को भाजपा की बैठक के दौरान पुलिस द्वारा किसानों पर लाठीचार्ज किया गया था। इस लाठीचार्ज से पहले एक आईएएस अधिकारी की वायरल हुई वीडियो ने आग में घी का काम किया। 30 अगस्त को लाठीचार्ज में घायल एक व्यक्ति की मौत हो गई। जिससे गुस्साए किसानों ने मंगलवार को करनाल की अनाज मंडी में महापंचायत का आयोजन किया।
किसानों की मांग है कि उनके खिलाफ लाठीचार्ज के आदेश देने वाले आईएएस के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। मृतक किसान के आश्रितों को 25 लाख रुपये मुआवजा तथा सरकारी नौकरी दी जाए। सरकार ने प्रशासन के माध्यम से इस आयोजन को टालने का प्रयास किया लेकिन असफल रही। प्रदेश सरकार ने सुरक्षा की दृष्टि से सोमवार की रात से ही करनाल तथा आसपास के पांच जिलों में फोन व इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी। महापंचायत के मद्देनजर आसपास के जिलों की पुलिस के अलावा अद्र्ध सैनिक बलों की 40 कंपनियों को यहां तैनात किया गया था।
मंगलवार की सुबह संयुक्त किसान मोर्चा के मुख्य वक्ता राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव, गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत कई किसान नेताओं के नेतृत्व में करनाल में जुटना शुरू हो गए। किसानों की बढ़ती भीड़ और टकराव की आशंका के चलते प्रशासन ने 11 सदस्यों की एक कमेटी के साथ अलग से वार्ता भी की। बैठक में वार्ता विफल होने के बाद सभी किसान नेता दोबारा अनाज मंडी में पहुंच गए और पहले से अधिक जोश के साथ लघु सचिवालय की तरफ कूच कर दिया। पुलिस ने वाटर कैनन की मदद से रोकने का प्रयास भी किया लेकिन किसान आगे बढ़ते रहे। किसान रास्ते में पुलिस द्वारा कई जगह लगाए गए बैरीकेड किसानों ने तोड़ दिए और करीब एक घंटे बाद किसान लघु सचिवालय परिसर में प्रवेश कर गए। जहां हर कदम पर पुलिस बल तैनात था। लघु सचिवालय में काफी जद्दोजहद के बाद सभी किसान वहीं धरने पर बैठ गए हैं।
 
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