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गुरुग्राम: डांस कला मेरे जीवन का हिस्सा नहीं मेरा जीवन है: टाइगर पॉप

Sanjay Mehra | November 26, 2020 04:59 PM

-इंडियाज बेस्ट डांसर रियलिटी शो की ट्रॉफी विजेता से खास बातचीत
-गुरुग्राम के अशोक विहार फेज-3 में परिवार के साथ रहते हैं टाइगर पॉप अजय सिंह

संजय मेहरा

गुरुग्राम। भारत-नेपाल की सीमा पर झीलों से घिरे गांव दोधारा कंचनपुर से अपने तीन बच्चों की अच्छी परवरिश को वर्ष 2003 में दो थाली, दो कटोरी, एक कढ़ाही व मिट्टी के तेल से जलने वाला स्टॉव लेकर गुरुग्राम आए दंपति गणेश कुमार व तुलसी देवी भले ही अब तक जीवन की जद्दोजहद से जूझते रहे हैं, लेकिन उनके छोटे बेटे ने उनके सपनों को पंख लगा दिए हैं। डांस की दुनिया में धमाल मचाकर आज बेटा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में चमकता सितारा बन गया है। जिन्हें उनके डांस और संगीत से चिढ़ थी। वे आज उसका स्वागत कर रहे हैं।

 

हम बात कर रहे हैं गुरुग्राम के अशोक विहार फेज-3 में छोटे से किराए के मकान में परिवार के साथ रहने वाले टाइगर पॉप यानी अजय सिंह की। सोनी एंटरटेनमेंट चैनल पर प्रसारित किए गए इंडियाज बेस्ट डांसर रियलिटी शो में टाइगर पॉप ने खूब पसीना बहाया। अपने डांस फॉर्म पॉप डांस से टाइगर पॉप ने ऐसा धमाल मचाया कि भारत से नेपाल सीमा तक ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में उनका डंका बज गया। जिन डांस की हस्तियों के डांस को देखकर टाइगर सदा सीखने का प्रयास करते रहे, वे हस्तियां टाइगर पॉप को उनकी सफलता पर बधाइयां दे रहे हैं। टाइगर को इनाम के रूप में 15 लाख रुपए व एक मारुति सुजूकी विटारा बे्रजा कार मिली है। टाइगर से मिलने वालों का दिनभर उनके घर पर तांता लगा रहता है। खासकर बच्चे उनके काफी चहेते हैं।

 

 

मां घरों में करती है सफाई, खाना बनाने का काम
चढ़ते सूरज को तो सब सलाम करते हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने में टाइगर पॉप ने जो मेहनत की है, वह हर कोई नहीं जानता। उससे हम आपको रूबरू कराते हैं। इसके पीछे परिवार का भी बहुत बड़ा योगदान है। टाइगर बताते हैं कि उनकी मां घरों में सफाई करने, खाना बनाने का काम करती हैं। पिता एक कंपनी में काम करते थे। वर्ष 2011 में 12 साल की उम्र में टाइगर को डांस के रियलिटी शो देखकर डांस करने का शौक चढ़ा। वह शौक धीरे-धीरे उसका जूनून बन गया और रंग-बिरंगी रोशनियों के बीच माया नगरी मुंबई में गरीब परिवार के इस चिराग ने सपना देख लिया। स्कूल के कार्यक्रमों में उसने अपनी प्रतिभा को निखारा। किराए के मकान में मात्र 6 बाई 8 फिट के कमरे में उसने डांस करना शुरू किया। यहां भी उसकी प्रतिभा को दबाने का बिल्डिंग में रहने वालों ने प्रयास किया। फिर टाइगर ने पार्कों में, गौशाला में जाकर डांस की रिहर्सल करनी शुरू की।

 

डांस कला ही मेरा जीवन है
टाइगर कहते हैं कि डांस कला उनके जीवन का हिस्सा नहीं, बल्कि उनका जीवन है। अपनी आर्ट के जरिए वह इस मुकाम तक पहुंचा है। हर किसी को यही संदेश है कि मेहनत करें, कभी हार ना मानें। अगर हमारी मेहनत पूरी होगी तो सफलता गारंटी से मिलेगी। भविष्य में खुद भी नए कलाकारों को प्रेरित करेंगे। बताएंगे कि सफलता किसी अमीर घराने की मोहताज नहीं है। टाइगर की मां तुलसी देवी कहती हैं कि पूरे परिवार की यही सपना था कि टाइगर कामयाब हो जाए। अपने सपने उन्होंने टाइगर में देखे और आज पूरी दुनिया का टाइगर चहेता बन गया।

 

गुरुग्राम में ही ली है 12वीं तक शिक्षा
टाइगर पॉप बताते हैं कि गुरुग्राम के प्रकाशदीप स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद रेलवे स्टेशन के पास भीमगढ़ खेड़ी के सरकारी स्कूल में छठी से दसवीं तक पढ़े। कक्षा 11वीं व 12वीं उन्होंने सेक्टर-4/7 स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से की। 12वीं तक पढऩे के बाद दो साल पूरे डांस को ही समर्पित किए। बेशक कोई सफलता नहीं मिली, लेकिन जुनून कम नहीं हुआ। माता-पिता ने डांस छोड़कर पढ़ाई करने का दबाव दिया, ताकि पढ़कर कोई नौकरी कर लेगा। परिजनों की मन रखने को टाइगर पॉप ने दिल्ली के मालवीय नगर स्थित भगत सिंह कालेज में बीए में दाखिला ले लिया। वहां भी उसने पढ़ाई से ज्यादा अपने डांस को महत्व दिया।

 

 
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