Religion
नौ देवियों के रूप में नौ कन्याएं

शास्त्रों में कहा गया है कि नौ देवियों के रूप में अष्टमी या नवमी के दिन व्रत का परायण करने से पहले नौ कन्याओं का पूजन करना चाहिए।  ये नौ कन्याएं नौ देवियों का ही रूप हैं हर कन्या एक देवी का रूप है  जिसका पूजन करते  हुए उपासक  परोक्ष रूप  से उस देवी का ही पूजन करता है।

13 और 14 अक्तूबर , को करें   कन्या पूजन ?

इस बार शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि का पूजन 14 अक्टूबर 2021 दिन गुरुवार को किया जाएगा और इसी के साथ नवरात्रि 

का समापन हो जाएगा। कन्या पूजन से एक दिन पहले ही कन्याओं को अपने घर आमंत्रित कर देना चाहिए। शास्त्रों के  अनुसार दो वर्ष लेकर 10 वर्ष तक की कन्या को कंजक पूजन के लिए आमंत्रित करना चाहिए यदि आप दुर्गाष्टमी के दिन करते  हैं तो कन्या पूजन 13 अक्टूबर को होगा और यदि महानवमी के दिन करते हैं तो कन्या पूजन 14 अक्टूबर को होगा।

 

भिवानी: कहीं डिजिटल तो कहीं फिजिकली मनाई जाएगी जन्माष्टमी, शहर हुआ कृष्णमय

बात करें शहर के मंदिरों की तो यहां जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर हैं। मंदिरों में सजावट की जा रही है। जन्माष्टमी के दिन राधा-कृष्ण को पहनाई जाने वाली डे्रेसेज भी नई खरीदी गई हैं। जन्माष्टमी का पर्व मथुरा, वृंदावन में जितनी धूमधाम से मनाया जाता है, उतनी धूमधाम के देश के अन्य शहरों में मनाया जाता है।

भिवानी: राधा-कृष्ण बन जन्माष्टमी की रिहर्सल करने में जुटे बच्चे

आगामी 30 अगस्त को मनाई जाने वाली श्रीकृष्णाष्टमी (जन्माष्टमी) की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। कहीं मंदिरों में साज-सजावट का काम हो रहा है तो कहीं बच्चे राधा-कृष्ण व अन्य पात्रों की भूमिका के लिए तैयार किए जा रहे हैं। घरों में उनके कार्यक्रमों की रिहर्सल हो रही है।

इस बार होलाष्टक रहेगा 21 मार्च  से 28 मार्च तक 

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक की अवधि को शास्त्रों में होलाष्टक कहा गया है। होलाष्टक शब्द दो शब्दों का संगम है। 

वो मुसलमान होकर भी मनाता है दीवाली, कारीगरों की करता है आरती

खास बात यह है कि त्योहारों पर वह कारीगरों को रोली-चावल से तिलक करके उनकी आरती उतारता है। इस दीवाली भी उसने अपनी ओर से बनाई गई इस परम्परा का निवर्हन करते हुए अपने कारीगरों का इसी तरह से सम्मान किया। अपने होटल के कारीगरों को वह भगवान के बराबर का दर्जा देता है।

कोरोना काल में कैसे करें साधारण विधि से अपने घर में ही श्राद्ध बदलें दान का स्वरुप

यह पहली बार ही ऐसा होगा कि पितृ पक्ष में, इन दिनों तर्पण कराने के लिए कर्मकांडी उपलब्ध न हों, भोजन ग्रहण करने के लिए के लिए बहुत कम ब्राहम्ण हामी भरें और श्राद्ध कर्म में अपने नजदीकी संबंधी तक सम्मिलित न हों। हिंदू धर्म सदा से ही समय स्थान व स्थिति अनुसार ढाल लेता है इसी लिए सनातन कहलाता है।

इस विधि से बांधे राखी 

बहनें भाई को लाल रोली या केसर या कुमकुम से तिलक करें ज्योति से आरती उतारते हुए उसकी दीर्घायु की कामना करे और मिठाई खिलाए। और राखी बांधते हुए ईश्वर से उसकी लंबी आयु की और रक्षा की कामना करें । भाई उपहार स्वरुप बहन को शगुन या उपहार अवश्य दे। पुलिस, सैनिक बल तथा सैनिकों को भी रक्षार्थ राखी बांधी जाती है।

क्यों बांधें राखी ?

आधुनिक युग में भाई - बहन एक दूसरे की पूर्ण सुरक्षा का  भी ख्याल रखें । नारी सम्मान हो।  समाज में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों में कमी आएगी। भाई-बहन को स्नेहप्रेम ,कर्तव्य एवं दायित्व में बांधने वाला राखी का पर्व जब भाई का मुंह मीठा करा के और कलाई पर धागा बांध कर मनाया जाता है तो रिश्तों की खुशबू सदा के लिए बनी रहती है और संबंधों की डोर में मिठास का एहसास आजीवन परिलक्षित होता रहता है।

इस बार क्यों खास है रक्षाबंधन

सावन के अंतिम सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व कई शुभ योग व नक्षत्रों के संयोग में 3 अगस्त को मनाया जाएगा।29 साल बाद श्रावण पूर्णिमा पर सावन के अंतिम सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व कई शुभ योग व नक्षत्रों के संयोग में 3 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार भद्रा और ग्रहण का भी रक्षाबंधन पर कोई साया नहीं है।

3 अगस्त के  रक्षाबन्धन पर इस बार भद्रा काल  की बजाय कोरोना काल का साया

अक्सर राखी बांधने केमुहूर्त में हर बार ,भद्रा के समय को लेकर असमंजस बना रहता है परंतु इस बार राखीबांधने के लिए पूरा दिन है , भद्रा काल की बजाय कोरोना काल का ध्यान रखना होगा। जहां तक संभव हो, वीडियो कॉल आदि से संबंधियों से संपर्क करें।

हरियाली तीज का पौराणिक महत्व

हिंदू धर्म में हर व्रत, पर्व और त्यौहार का पौराणिक महत्व होता है और उससे जुड़ी कोई रोचक कहानी व कथा होती है। हरियाली तीज उत्सव को भी भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस कड़ी तपस्या और 108वें जन्म के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। कहा जाता है कि श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही भगवान शंकर ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

हरियाली तीज की तिथि व मुहूर्त

हरियाली तीज 2020

23 जुलाई

तृतीया तिथि - गुरुवार, 23 जुलाई 2020

तृतीया तिथि प्रारंभ - 19:21 बजे (22 जुलाई 2020 ) से

तृतीया तिथि समाप्त - 17:02 बजे (23 जुलाई 2020 ) तक

जानिए इस बार कितना पावन  है सावन

भारत में वसंत मास की तरह श्रावण मास का भी संपूर्ण जनमानस को बेसब्री से इंतजार रहता है जब चारों ओर मानसून के दौरान प्रकृति के साथ साथ तथा मानस पटल पर भी हरियाली छाने लगती है। श्रावण कृष्ण प्रतिपदा , 5 जुलाई की प्रातः 10 बजकर 15 मिनट पर आरंभ होकर सोमवार की सुबह 9ः 25 तक रहेगी, इसी लिए सावन का आरंभ 5 की बजाय 6 जुलाई से हो रहा है।

क्या देव भी पौराणिक काल में क्वारंटाइन होते थे? कोरोना महामारी के बीच जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन महाभारत में है काशी विश्वनाथ का वर्णन हर किसी की चिंता हरती है चिंतपूर्णी सन्त निरंकारी मिशन ने मनीमाजरा के सरकारी अस्पताल को सौंपी 50 पीपीई किट इलाहाबाद के इस मंदिर में लेटे हुए हैं हनुमान जी एक बार जरूर करें देवी के शक्‍तिपीठ महालक्ष्मी मंदिर कोल्हापुर के दर्शन घर लाएं श्री गणेश की ऐसी मूर्ति, कभी नहीं होगी धन की कमी विवाह पंचमी: इस दिन हुआ था भगवान राम-सीता का विवाह, पूजा करने से मिलेंगे ये लाभ  शुक्रवार को करें चमेली के फूल से ये उपाय, शुक्र दोष से निजात मिलने के साथ होगी हर इच्छा पूरी शनि अमावस्या 2017: बन रहा है खास योग, बीमारियों से निजात पाने के लिए अपनाएं ये उपाय शास्त्रों के मुताबिक रविवार के दिन सरसों के तेल से सिर पर मालिश करना है अशुभ, जानिए क्यों  14 नवंबर आपके लिए हो सकता है खास, इन दिन ये उपाय कर पाएं मनवांछित फल क्या आपको भी रात में आते हैं बुरे और डरावने सपने, करें ये उपाय एक मंदिर ऐसा भी : जहां मुर्दे भी हो जाते हैं जीवित भैरवाष्टमी में करें पूजन, क्रूर ग्रह और शनि का प्रकोप होगा शांत इन सामान को उधार लेने से बचें, हो सकता है भारी नुकसान 90 साल में बनकर तैयार हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी गौतम बुद्ध की मूर्ति 4 नंवबर है सभी के लिए बहुत ही खास, इस दिन ये उपाय कर भरे अपनी तिजोरियां  देव के जगने के बाद नहीं होगे शुभ कार्य, जानिए कब-कब है विवाह के शुभ मुहूर्त देवोत्‍थान एकादशी : नींद से जागेंगे भगवान, मंगलवार से शुरू करें मंगल कार्य देवोत्‍थान एकादशी पर शुभ होता है तुलसी व‍िवाह व पूजन, जानें इसका महत्‍व और कथा रावण का मंदिर, जहां पूजनीय हैं रामायण के सभी पात्र तुलसी जी के 8 नाम, जो पूर्ण करते हैं पूजन और देते हैं पुण्य आज से शुरु हो चुका है रोग पंचक, भूलकर भी 3 नंवबर तक न करें ये काम अक्षय नवमी: घर पर लगाएं इस दिशा में आंवला का पेड़, होगे रुके हुए हर काम पूरे बाल्यावस्था में हनुमान जी को मिला श्राप, बल एवं तेज हो गया कम शनि ने किया राशि परिवर्तन, कुप्रभावों से बचने के लिए समझें प्रकृति के इशारे छठ पूजा के समय राशिनुसार करें ये उपाय, चमक जाएगी आपकी किस्मत सूर्य को अर्ध्य करते समय करें ये उपाय, होगी हर इच्छा पूरी